देव छठ मेला में यातायात सुविधा व नियंत्रण कक्ष श्रद्धालुओं के लिए मददगार बनकर उभरा। जिला प्रशासन के द्वारा व्रतियों व श्रद्धालुओं के लिए प्राइवेट वाहन की व्यवस्था की गई थी। इन वाहनों से खरना के दिन से ही व्रतियों को देव लाया जा रहा था। वहीं पहले अर्घ्य के दिन अफवाह के बाद फैली भगदड़ में अपने परिजनों से बिछड़े बच्चों व सदस्यों को मिलाने में स्थापित नियंत्रण कक्ष ने अहम भूमिका निभाई। मेला को देखते हुए जिला प्रशासन के द्वारा छह नियंत्रण कक्ष बनाए गए थे। जिनमें सूर्यकुंड के पास कर्पूरी मंच, सूर्य मंदिर परिसर, किला पर, ब्लॉक परिसर में व देव थाना के पास नियंत्रण कक्ष बनाया गया था। जहां प्रशासन द्वारा कर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी की गई थी। भगदड़ की घटना के बाद इन सभी नियंत्रण कक्षों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। हर कोई अपने भूले परिजन को खोजने के लिए नियंत्रण कक्ष पहुंचे थे। विभागीय कर्मियों के अनुसार पहने अर्घ्य के दिन जो बच्चे व परिजन खोए थे उनमें से अधिकांश नियंत्रण कक्ष के माध्यम से मिल गए।
डीएम व एसपी स्वयं करते रहे निगरानी
छठ मेला में भीड़ को नियंत्रित करने सहित अन्य व्यवस्थाओं को लेकर डीएम राहुल रंजन महिवाल व एसपी दीपक बर्णवाल स्वयं निगरानी करते रहे। इनके अलावे एएसपी अभियान राजेश कुमार सिंह, सदर एसडीओ डॉ प्रदीप कुमार, एसडीपीओ अनूप कुमार, डीटीओ अनिल कुमार सिन्हा व डीपीआरओ धर्मवीर कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी भी सजग दिखे। प्रशासन के द्वारा छठ व्रतियों के लिए जो यातायात सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। उसमें फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन ने भी अपनी भूमिका निभाई। एसोसिएशन के अध्यक्ष सह को-ऑपरेटिव अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह ने बताया कि खरना के दिन सुबह सात बजे से रात्रि आठ बजे तक 50 टेम्पो चलाया गया। वहीं पहले अर्घ्य के दिन सुबह पांच बजे से शाम पांच बजे तक टेम्पो का परिचालन कराया गया। ताकि व्रतियों को सूर्यमंदिर व सूर्यकुंड आने में कोई दिक्कत ना हो।
स्काउट गाइड व एनसीसी कैडेटों ने भी की मदद
देव छठ मेला में 325 स्काउट गाइड व 200 एनसीसी कैडेट भी भीड़ नियंत्रण के लिए लगाए गए थे। ये सभी मंदिर से लेकर सूर्यकुंड तक जाने वाले रास्तों में यातायात व्यवस्थित करने में लगे हुए थे। भीड़ अनियंत्रित ना हो, इसके लिए रास्ता में मानव श्रृंखला बनाकर सेवा में लगे हुए थे।
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