जलसंरक्षण को लेकर सरकार के द्वारा चलाई जा रही जल-जीवन-हरियाली योजना को धरातल पर उतारने के लिये जिले की सभी 54 पंचायतों के सार्वजनिक तालाबों, आहार, पईन को अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा। जिले में अतिक्रमित जलस्रोतों को 31 दिसंबर तक मुक्त करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री के जाते ही अतिक्रमित जलस्रोतों को खाली कराना शायद अधिकारी भूल गए हैं। सरकारी आकंड़ों के अनुसार शेखपुरा जिले में कुल 379 सार्वजनिक जलस्रोतों एवं 72 सार्वजनिक कुओं को चिह्नित किया गया था और इसको लेकर सीओ द्वारा 267 तालाब, आहार, पईन को अतिक्रमणमुक्त करने को लेकर नोटिस भी दिया गया था। साथ ही पांच तालाब, आहार, पईन को अतिक्रमण मुक्त करने का अंतिम आदेश भी जारी हो चूका था। बावजूद अभी तक तालाब, आहार, पईन को अतिक्रमणमुक्त नहीं कराया गया। इससे यही जाहिर होता है कि जल-जीवन-हरियाली योजना को धरातल पर उतारने के लिये तैयारी शेखपुरा में फेल होती दिख रही है। पूर्व में डीडीसी सत्येंद्र प्रसाद सिंह ने बताया था कि इन सभी तालाबों, पोखरों को अतिक्रमणमुक्त करने के लिये कदम उठाया जा रहा है। इस संबंध में सभी सीओ को निर्देश दिया जा चुका है। जल संरक्षण को जिले के सभी पंचायतों में मनरेगा की एक-एक योजना को इसमें शामिल किया गया है। जिसके तहत जल संरक्षण हेतू पोखर, तालाब, पईन की खुदाई के अलावे सोख्ता निर्माण का कार्य शामिल है। जल जीवन हरियाली योजना के माध्यम से जल संरक्षण, वर्षा जल बचाव, पौधारोपण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। लेकिन अब कुछ भी बताने से बच रहे है।

सार्वजनिक तालाबों से हटेगा अतिक्रमण

डीडीसी ने कहा था कि जिले में जल संरक्षण को लेकर सावर्जनिक तालाबों को पुनर्जीवित करने को लेकर सभी सार्वजनिक तालाबों से अतिक्रमण को हटाया जायेगा। इसको लेकर जिले के सभी तालाब, पोखरों का सर्वेक्षण किया जा चूका है। अब इन तालाब पर से मुक्त किये जाने का निर्देश सीओ को दिया गया है। जिले में संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अधिकारियों को आम जन से सहयोग लेने का निर्देश दिया गया है। 31 दिसम्बर तक अतिक्रमित तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि सीएम के जाते ही अधिकारी भूल गए और अतिक्रमण मुक्त का कार्य अधर में लटक गया है।

लापरवाही जल जीवन हरियाली योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी शेखपुरा में नहीं दिख रही है

अतिक्रमणमुक्त करने का कार्य भूले अधिकारी

जल संरक्षण को लेकर सरकार के द्वारा विभिन्न तालाब, आहार, पईन और कुओं का जीर्णोदार किया जाना है। इसके लिये मुख्यमंत्री के 28 दिसम्बर को जलजीवन हरियाली योजना के तहत शेखपुरा भी पहुंचे थे और इसके पार्टी लोगों को जागरूक भी किया था। लेकिन सीएम के जाते ही सभी अधिकारी तालाब, आहर, पईन से अतिक्रमण हटाकर उसका जीर्णोदार करने में फ़िलहाल में को रूचि नहीं दिखा रहे है। जबकि 31 दिसंबर को अतिक्रमित जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त किये जाने का लक्षय निर्धारित रखा गया था।

बरबीघा में 10 लोगों को भेजी गई है नोटिस

बरबीघा प्रखंड के सीओ अशोक कुमार ने कहा कि तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने से पहले अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया जाएगा जिस पर फिर वरीय अधिकारियों द्वारा सुनवाई की जाएगी। सुनवाई के बाद ही तालाब आहार व पैन को अतिक्रमण मुक्त किया जा सकता है।फिलहाल एक भी तालाब को बरबीघा के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अतिक्रमण मुक्त नहीं किया जा सका है। सिर्फ 10 गांव के लोगों को नोटिस किया गया है। प्रशासनिक विभाग द्वारा कछुए की चाल से कार्य करने के कारण फिलहाल सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का सभी आहार पैन तथा तलाब को अतिक्रमण मुक्त करने का पूरा होता दिखाई नहीं पड़ रहा है।

अतिक्रमणमुक्त कराने के नाम पर अधिकारी गिना रहे कई तरह की समस्याएं

सम्बंधित अधिकारी बताते है कि कर्मियों की कमी रहने होने के कारण अभी तक तालाब की मापी नहीं हो पाई है। जिसके कारण अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाया है। जबकि कई अधिकारियों ने बताया कि यह कार्य निविदा के द्वारा किया जा रहा है। जिसके कारण उनके द्वारा द्वारा अभी तक किसी प्रकार की सूचना एवं कोई सूची कार्यलाय को उपलब्ध नहीं कराई गयी हैं इसलिए हम अभी सही आकलन नहीं बता सकते हैं।

किस प्रखंड में हैं कितने सार्वजनिक जल स्रोत

जिले के सभी प्रखंडों के सार्वजनिक तालाब, आहार पईन का सर्वेक्षण कराया जा चूका है। जिसके तहत शेखपुरा सदर प्रखंड में 83 तालाब व आहार हैं, जबकि 10 कुआं है। वहीं बरबीघा में 27 तालाब एवं 04 कुआं हैं। चेवाड़ा में 50 तालाब, 02 कुआं है, जबकि अरियरी प्रखंड में 125 तालाब, आहार के अलावे 17 कुआं है। वहीं शेखोपुरसराय प्रखंड में 69 तालाब और 31 कुआं है। वहीं घाटकुसुम्भा प्रखंड में 25 तालाब के साथ ही 8 सार्वजनिक कुआं है। कुल 379 तालाब, आहार पईन और 72 कुआं है।



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Ariyri News - by december 31 all 267 encroached waters were to be vacated officials forgotten as soon as cm went

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