कोरोना संक्रमण से उत्पन्न आर्थिक संकट से निपटने के लिए श्रम कानून में बदलाव की तैयारी है। यूपी व मध्यप्रदेश की तर्ज पर बिहार का नया श्रम कानून होगा। 50 से कम श्रमिक वाले कारखाने श्रम कानून के दायरे से बाहर रखे जाएंगे। अभी 20 से अधिक श्रमिक वाले उद्योग इस दायरे में हैं। तीन साल तक लेबर इंस्पेक्टर किसी भी कारखाने का निरीक्षण नहीं करेंगे। कारखानाें में 3 साल तक कार्यदिवस 8 से बढ़ा कर 12 घंटे किया जाएगा। यानी सप्ताह में एक मजदूर से 72 घंटे काम कराया जा सकेगा। 6 घंटे के बाद आधा घंटा का ब्रेक मिलेगा। उद्योग पंजीकरण की ऑनलाइन प्रक्रिया 30 के बदले एक दिन में पूरी होगी। विभाग ने नए कानून का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी ली जाएगी। नए श्रम कानून में ट्रेड यूनियन को मान्यता देने का पहले का कानून को भी खत्म होगा। औद्योगिक विवादों का निबटारा, व्यावसायिक सुरक्षा, श्रमिकों की सेहत व काम करने की स्थिति से संबंधित कानून समाप्त हो जाएंगे। श्रमिकों से किसी भी शिफ्ट में काम कराया जा सकेगा। श्रमिकों पर कार्रवाई में श्रम विभाग व श्रम न्यायालय का दखल नहीं होगा। 50 से कम श्रमिक वाले ठेकेदार को निबंधन की जरूरत नहीं होगी। अभी 20 से अधिक श्रमिक वाले ठेकेदार को निबंधन कराना अनिवार्य है। उद्याेग या कारखाने को 61 अलग-अलग रजिस्टर की जगह एक रजिस्टर रखना होगा। 13 रिटर्न दाखिल करने की जगह एक ही रिटर्न दाखिल करना होगा।
मुंबई से भेड़ बकरियों की तरह लदकर पहुंचे मजदूर
मुंबई से भेड़ बकरियों की तरह लद कर ट्रक से 100 से अधिक मजदूर बुधवार को बिहार पहुंचे। सभी विभिन्न जिलों के हैं। हर मजदूर से 5000 रुपए तक की वसूली की गई। मजदूरों ने बताया कि ट्रक वाले ने जिले के हिसाब से किराया लिया।
1.37 लाख आचुके, और 4.27 लाख प्रवासी आएंगे
बिहार आने के इच्छुक प्रवासियों को 7 दिनों के भीतर वापस लाने की घोषणा के साथ ही अलग-अलग राज्यों से और 267 ट्रेनों का शेड्यूल तैयार हो गया है। 11 मई तक बिहार में 137401 प्रवासी आ चुके हैं। अगले कुछ दिनों में 427200 प्रवासी पहुंच जाएंगे। बुधवार को आईपीआरडी सचिव अनुपम कुमार ने बताया कि हम सभी प्रवासियों को 7 दिनों के भीतर वापस लाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। लिहाजा ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी। बुधवार को 24 ट्रेनों से 30348 लोग आए। गुरुवार को 34 ट्रेनों से 50910 लोग बिहार आएंगे। जो लोग दिल्ली से राजधानी ट्रेन से आ रहे हैं, ऐसे लोग स्टेशन पर उतरने के बाद सीधे घर जाएंगे।
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