एनीमिया यानी खून की कमी को नजरअंदाज न करें। इससे शरीर के लिए जरूरी ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसे दूसरे नाम थैलिसिमिया भी कहा जाता है। यह रक्त जनित रोग है। यह मानव शरीर में हीमोग्लोबिन की उत्पादन को कम करता है।हीमोग्लोबिन द्वारा ही पूरे शरीर की कोशिकाओं में ऑक्सीजन पहुचता है। हेमोग्लोबिन का कम स्तर शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की कमी करता है। इससे ग्रसित व्यक्ति के शरीर में रक्ताल्पता या एनीमिया की शिकायत हो जाती है। शरीर का पीलापन, थकावट एवं कमजोरी का एहसास होना इसके प्राथमिक लक्षण होते हैं। शीघ्रता से उपचार न मिलने पर थैलिसिमिया के मरीज के शरीर में खून के थक्के जमा होने लगते हैं। थैलिसिमिया के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष 8 मई को विश्व थैलिसिमिया दिवस मनाया जाता है।
एनीमिया के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें : सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि थैलिसिमिया मूलतः अनुवांशिक होता है। अगर एनीमिया के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सीय परामर्श लें। नजरअंदाज बिलकुल न करें।

खून की कमी के

  • प्रारंभिक लक्षण
  • शरीर एवं आँखों का पीलापन
  • पीलिया से ग्रसित होना
  • स्वभाव में चिड़चिड़ापन
  • भूख न लगना
  • थकावट एवं कमजोरी होना

यह प्रयास उपचार में हो सकता है सहायक | थैलिसिमिया से पीड़ित व्यक्ति को चेकअप के उपरांत उपचार दिया जाता है। मरीज के शरीर में रक्ताल्पता के स्तर के अनुसार इलाज बताया जाता है। एनीमिया की स्तिथि गंभीर होने पर उन्हें खून चढ़ाना भी पड़ सकता है।



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