जीएमसीएच में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी निर्दोष कुमार ने बेटे के तीसरे जन्मदिन (19 मई) पर उसके नाम पत्र लिखा है। उसमें लिखा है कि बेटे जाे खुशी मुझे तुम्हारे चेहरे काे देखने के बाद मिलती है। वही खुशी मुझे यहां अाए मरीजाें अाैर प्रवासी मजदूराें की सेवा कर मिलती है। उन्हाेंने लिखा- मेरे प्रिय पुत्र शिवांश, तुम्हें तेरे तीसरे जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। तुम सदा खुश रहो और मुस्कुराते रहो। तेरे पिता यहां वैश्विक महामारी में काेराेना वारियर्स के रूप में बाहर से अाए प्रवासियाें काे अपनी सेवा दे रहे हैं। इस समय मुझे उनकी सेवा से ही संतुष्टि मिलती है। बेटा शिवांश ने अपने तीसरे जन्मदिन पर पिता को बुलाने की इच्छा जताई थी, जिसके जवाब में पुत्र की भावना आहत नहीं हो, तो पिता ने पत्र लिखकर उसे पोस्ट किया और शुभकामना दी।
कोई दरवाजे पर कुछ मांगने आए तो उसे खाली हाथ लौटने मत देना
जीएमसीएच के एनसीडी सेल में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी निर्दोष कुमार का परिवार समस्तीपुर के राेसड़ा में रहता है। उन्हाेंने अपने पत्र में कहा है कि बेटा मैं जानता हूं कि तुम्हारी मां आर्थिक व मानसिक तंगी से गुजर रही है। लेकिन मैं मजबूर हूं। यहां मरीजों की सेवा व प्रवासी मजदूरों की सेवा को दरकिनार नहीं कर सकता। मेरी बेटियों को मेरा प्यार। पूरा देश आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। कोई दरवाजे पर कुछ मांगने आए तो उसे खाली हाथ वापस नहीं करना।
पत्र में अपनी भूमिका के बारे में भी लिखा
उन्हाेंने लिखा- तुम्हारे पिता इस वैश्विक महामारी कोरोना में कोरोना वारियर्स की तरह बाहर से आए हुए मजदूर भाइयों जो जिले के प्रत्येक प्रखंड में बने क्वारेंटाइन सेंटर पर रह रहे हैं। जिनमें बेचैनी, डर, भय, अवसाद, इत्यादि कोरोना के कारण हो रहा है। उन्हें अपनी काउंसिलिंग से दूर कर रहे हैं। कोरोना से बचाव का तरीका भी समझाते हैं। जैसे कोरोना से डरना नहीं लड़ना है। मास्क लगाके दूरी बना के चलना है। बिना काम का कोई चीज अपना हो या गैरों का नहीं छूना है। हाथ हमेशा धोते रहना, पानी प्राय गरम ही पीना है। बाहर से आने पर हाथ पैर अच्छा से धोना है। इत्यादि इत्यादि। ...अंत में लिखा- तुम्हें बहुत-बहुत आशीर्वाद, मुस्कुराते रहो, स्वस्थ रहो।
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