लॉकडाउन के कारण जिले के कई छोटे-छोटे बाजार गुलजार होने लगे हैं। इसका कारण प्रवासियों द्वारा अपने गांव लौटना है। ऐसे लोग रोजी- रोटी के लिए बाहर काम करने गए थे। लेकिन लॉकडाउन की घोषणा होने के कारण प्रवासी बाहर में ही फंस गए।
जैसे-जैसे लोग वापस अपने गांव लौट रहे हैं, वैसे- वैसे गांव के चौपालों व दुकानों पर हलचल तेज हो गई है। हालांकि कई लोग अभी भी क्वारेंटाइन में रह रहे हैं। लेकिन ऐसे लोगों के घरों में अपनों के लौटने की खुशी में मानो बहार आ गई है। ऐसे लोगों के परिजनों की खुशी इस बात की है कि फंसे होने के कारण काफी चिंता हो रही थी।
ऐसे परिवार का दिन मुश्किल से कट रहा था। पैसा रहते भी दिन व रात काटना मुश्किल हो गया था। लॉकडाउन ने प्रवासियों के जीवन में बहुत परिवर्तन ला दिया है। प्रवासियों को आर्थिक समस्या तो हो रही है। लेकिन, दूसरी सुकून देने वाली बात यह है कि लोग अपनी मिट्टी से जुड़कर खेती से लेकर, गांव में दुकानदारी, सब्जी बेचने का नया रोजगार शुरू करने का प्लान बनाने में जुट गए हैं।
वहीं, पहले भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों को अपनों के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता था। आज पूरे परिवार के लोग एकसाथ बैठकर अपने सुख-दुख पर चर्चा करते हैं। घर-परिवार की चिंता में मन अब दोबारा बाहर जाने की गवाही नहीं दे रहा है। मठाही के समीप एक गांव में 12 से 15 लोग लौट कर आए। पहले तो सभी को क्वारेंटाइन किया गया। बाद में वापस लौटने पर प्रवासियों के अंदर उत्साह के साथ-साथ नए तरीके से जीने की चाह दिखी। उक्त गांव के श्याम पंडित का कहना था कि वे पंजाब में राजमिस्त्री का काम करते थे।
साथ में मेरा पुत्र राजू पंडित भी मजदूरी करता था। लॉकडाउन के बाद वहीं फंस गया। लेकिन जैसे ही लौटा तभी रास्ते में फैसला कर लिया कि अब वो गांव में ही पंजाब जैसी कामयाबी लाएंगे। इसी तरह भर्राही बाजार के आसपास गांव में लौटे नारायण राम का कहना था कि वे दिल्ली के समीप एक स्थान पर वेल्डिंग का काम करते थे। अब लौटने के बाद निर्णय लिया है कि यहीं रहकर बिहार को पंजाब बनाऊंगा।
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