ट्रेड यूनियन संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक जिला संयोजक रामचंद्र दास की अध्यक्षता में हुई।। इस अवसर पर कामरेड रामचंद्र दास ने कहा कि कोरोना संकट की इस घड़ी को केंद्र व राज्य सरकार मजदूरों के लिए बने नया श्रम कानूनों को खत्म करने के अवसर के रूप में प्रयोग कर रही है।

उन्होंने कहा कि बिहार सहित देश के अन्य राज्यों में 8 घंटे के बदले 12 घंटे काम कराने वाला अधिनियम एक काला कानून है। इसका फायदा पूंजीवादी व्यवस्था को होगा। मजदूर आर्थिक रूप से और कमजोर होते जाएगा। यह मानवीय ही नहीं बल्कि आपराधिक भी है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि निलंबित किए गए श्रम कानून में 12 घंटे के कार्य दिवस के अध्यादेश को तुरंत वापस लिया जाए। निबंधित निर्माण मजदूरों को अनुदान की राशि 10 लाख रुपए, मनरेगा के मजदूरों को 200 दिन का काम और सभी को 3 महीने का राशन प्रदान किया जाए।

उन्होंने कहा कि 22 मई को मधेपुरा शहर में लॉकडाउन का पालन करते हुए ट्रेड यूनियन के सभी संगठनों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर प्रतिवाद मार्च गोशाला परिसर से सुबह 11 बजे निकाला जाएगा, जो स्टेशन चौक पर जाकर समाप्त होगा। बैठक में लक्ष्मण साह, एक्टू के सीताराम रजक, मोहम्मद ताज आलम, गोविंद शर्मा, जिला संयोजक सचिव सीटू के लाल यादव, अशोक दास व गणेश राज सहित अन्य भी मौजूदथे।



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Government should soon withdraw the changes in labor laws: Ramchandra Das

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