सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत का खास महत्व माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। हिंदू धर्म के अनुसार जो महिला सच्चे मन से वट सावित्री का व्रत रखती हैं, उनके पति की आयु बढ़ती है। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है। इस साल यह व्रत 22 मई को मनाया जाएगा।
पंडित प्रदीप कुमार मिश्र के अनुसार यह सौभाग्यवती महिलाओं का प्रमुख पर्व है। इस पर्व पर महिलाएं बरगद के वृक्ष का पूजन अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगल कामना के साथ करती है। इस दिन सत्यवान सावित्री की यमराज के साथ पूजा की जाती है।
सावित्री अपने पति सत्यवान का प्राण यमराज से ले आई थी वापस
मान्यता है कि इसी दिन सावित्री अपने पति सत्यवान का प्राण यमराज से वापस लाई थी, इसलिए वट सावित्री व्रत वाले दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनाने का विधान है। मान्यता के अनुसार इस दिन उपवास और पूजा करने वाली महिलाओं के पति पर आई हर विपदा टल जाती और उनकी आयु लंबी होती है। वहीं, महिलाओं की शादीशुदा जिंदगी में भी किसी प्रकार की परेशानी ठीक हाे जाती है।
हिंदू धर्म में वट वृक्ष को माना जाता है पूजनीय
हिंदू धर्म में वट वृक्ष को पूजनीय माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक, ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) तीनों देवों का बरगद के पेड़ में वास होता है। इसलिए कहा जाता है कि सौभाग्य की प्राप्ति बरगद के पेड़ की आराधना करने से मिलती है। वट सावित्री व्रत में तीनों देवताओं से अपने पति की दीर्घायु की कामना महिलाएं सावित्री के समान करती है। इससे उनके पति के जीवन में समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
12 मई की रात 9:35 मिनट से लेकर 22 मई की रात 11:07 मिनट तक रहेगी अमावस्या तिथि
हिंदू पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत होता है। इस बार 22 मई को ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि आ रही है। 21 मई रात 9 बजकर 35 मिनट को अमावस्या तिथि शुरू होगी और 22 मई की रात 11 बजकर 7 मिनट तक अमावस्या तिथि समाप्त होगी।
-पंडित प्रदीप मिश्र



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वट-वृक्ष की पूजा करती महिलायें।

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