अब तो सतर्क हो जाइए! कोरोना से मौत की गति बढ़ गई है और मरने वालों में वह लोग हैं, जिन्हें बचाने के लिए सरकार शुरू से ताकीद कर रही थी। कोरोना के कारण बिहार में मरने वाले 500 लोगों का भास्कर ने विश्लेषण किया तो सामने आया कि 60 से 92 साल तक के ही 212 लोगों की मौत हुई है। बार-बार चेतावनी के बावजूद बीपी, शुगर, हार्ट, किडनी, लंग्स, लिवर, कैंसर आदि के रोगियों का ध्यान रखने में परिवार, समाज और सरकार से कहीं न कहीं चूक हो रही है। मृतकों में सर्वाधिक 130 तो पटना के ही थे।
64 की मौत के बाद पता चला कोरोना पॉजिटिव थे
विश्लेषण में सामने आया कि 55 को कोरोना से लड़ने के लिए एक भी दिन का समय नहीं मिला। मतलब, रिपोर्ट आने या भर्ती होने के दिन ही मौत हो गई। 64 लोगों के परिजनों को उनकी मौत के बाद पता चला कि वे पॉजिटिव थे। 46 की रिपोर्ट मौत के अगले दिन आई। 11 की दूसरे दिन और 7 की तीसरे दिन। जरूरी नहीं कि लक्षण हों, तभी अस्पताल जाएं। भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना ही अंतिम उपाय है और मास्क-सेनिटाइजर के सहारे खुद को बचाए रखना ही समय की मांग है।
बीपी-शुगर वाले कोरोना के सॉफ्ट टारगेट
ब्लड प्रेशर 136
डायबिटीज 133
शुगर-बीपी 50
शुगर-बीपी-अन्य 05
हार्ट पेशेंट्स 103
कैंसर 13
लंग्स 77
टीबी 14
दमा 28
किडनी 23
लिवर 08
बिहार में कोरोना ने सबसे कम 11 साल की लड़की की जान ली। उसे पहले से लंग्स डिजीज था। 15 साल के लड़के को पहले से कोई बीमारी नहीं थी, वह 21 दिन बाद कोरोना से हार गया। यह दोनों मौतें पटना में हुईं। 15 साल का एक लड़का कोरोना की चपेट में आया और पटना पहुचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। उसे कोई बीमारी नहीं थी। 11 से 30 साल के बीच कुल 20 की कोरोना ने जान ली। इनमें चार लड़कियां थीं। इन 20 में से 11 को पहले से कोई बीमारी नहीं थी। कोरोना के खौफ से 21-25 वर्ष के नौजवानों ने आत्महत्या भी की।
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