जिले के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अनुबंधित कर्मी अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर रविवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसके कारण कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान सैंपल कलेक्शन व कोरोना से संबंधित डाटा का कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया। हालांकि सिविल सर्जन ने कोरोना के सैंपल कलेक्शन होने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि स्थायी लैब टेक्नीशियन के द्वारा कुछ संदिग्ध मरीजों का सैंपल लिया गया है। जबकि हड़ताली कर्मियों ने जिला स्वास्थ्य समिति, कोरोना का ट्रू नेट लैब, सैंपल कलेक्शन सेंटर, एफआरयू आदि में ताला जड़ दिया है। जिसके कारण ट्रू नेट व एंटीजेन से एक भी संदिग्ध मरीजों की जांच नहीं हुई।
दूर-दराज से आए कई कोरोना संदिग्धों का जांच नहीं हुआ। सभी को बिना जांच के ही वापस जाना पड़ा। कई मरीजों ने बताया कि सर्दी, खांसी व बुखार से पीड़ित हैं। डॉक्टर ने कोरोना के जांच कराने को कहा है। जब तक जांच नही होगी और रिपोर्ट नहीं आएगा, इलाज नहीं होगी। जांच नहीं होने की स्थिति में बीमारी के और बढ़ने की संभावना है। एनएचएम के तहत कार्यरत सभी संविदा कर्मियों की हड़ताल पर चले जाने के कारण रिपोर्टिंग कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। वहीं कोरोना से संबंधित सैंपल कलेक्शन एवं जांच रिपोर्ट का प्रतिवेदन कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है। बिहार राज्य संविदा आधारित स्वास्थ्य कर्मी महासंघ के जिला संयोजक विनय कुमार सिंह ने बताया कि जब तक सरकार हमारी मांगों को नहीं मान लेती है तब तक हड़ताल जारी रहेगा।
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