(कृष्ण मुरारी पांडेय) सदर अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक के भरोसे अगर मरीज की जिंदगी बचाना चाहते हैं तो मौके-बेमौके खून की जरूरत पड़ने पर आपको ब्लड बैंक पर ताला झूलता मिलेगा। शाम 6 बजे के बाद यहां ‘जिंदगी’ मिलने का द्वार बंद हो जाता है। हां, अगर आप रसूख वाले हैं तो रात में ताला तो खुल सकता है लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप की जरूरत वाले ग्रुप का ब्लड मिल ही जाए।
इमरजेंसी में ऑन कॉल ब्लड बैंक कर्मचारी भी यहां उपलब्ध नहीं होते हैं। जरूरत पर एक यूनिट खून भी मिलना मुश्किल है। इसकी प्रमुख वजह यहां खून की कमी नहीं बल्कि कर्मियों की अफशरशाही है। यहां के स्टाफ अपने अधिकारियों के निकलते ही घर का रास्ता ले लेते हैं। ब्लड बैंक 24 घंटे खोलने का निर्देश जरूर है लेकिन यहां के कर्मियों की मनमानी के आगे सरकार के सभी आदेश फेल हैं।
गर्भवती महिलाओं को ज्यादा दिक्कत
सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि एनीमिया की शिकार अधिकतर महिलाएं होती हैं। उनमें शरीर के रक्त में हेमोग्लोबिन की कमी होने के कारण गर्भावस्था में आराम, अधिक मात्रा में विटामिन, मिनरल व फाइवर आदि की जरूरत होती है। ऐसे में ब्लड नहीं मिलना मरीज के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
ज्यादातर को गंभीर बताकर कर दिया जाता है रेफर
अस्पताल में खून के जरूरतमंद मरीजों का इलाज राम भरोसे किया जा रहा है। कोरोना काल में भी अस्पताल में रोजाना लगभग 500 सौ मरीज पहुंचते हैं। इनमें मौसमी बीमारी सहित एक्सिडेंटल, टीवी, एनीमिया, गर्भवती महिलाएं, सिजेरियन व बंध्याकरण के मरीज शामिल हैं। चिकित्सकों की मानें, तो मरीजों में लगभग 65 प्रतिशत खून की कमी पायी जाती है।
अधिकतर मरीज एनीमिया के शिकार पाये जाते हैं। उनमें चक्कर आना, थकान होना, त्वचा पीला पड़ना, सीने में दर्द, लगातार सिर में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं। घायल मरीज, थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चे, गर्भवती महिलाओं व एनीमिया के शिकार मरीजों को खून की जरूरत पड़ती है। लेकिन, अस्पताल में मरीजों को खून के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ब्लड के लिए इधर-उधर भटक रहे थे परिजन
रविवार की सुबह हुसैनगंज के बिंदवल रसूलपुर निवासी गुड्डू कुमार की पत्नी सोनामती देवी इमरजेंसी हालत में सदर अस्पताल आई थी। उनके साथ मदद के लिए उसी गांव की रहनेवाली आशा संजू देवी व तरवारा थानाक्षेत्र के दनियालपुर की स्वीपर रंजना देवी भी थी। गुड्डू के भाई विशाल ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा कि पेन कम है। शाम 6:00 बजे महिला वार्ड की डाॅक्टर ने कहा कि ब्लड कम है।
ब्लड की तलाश में ब्लड बैंक आए तो यह बंद पड़ा था। पूछने पर पता चला कि शाम छह बजे ही मैडम बंद कर के चली गई हैं। ब्लड बैंक के चिकित्सा प्रभारी भी नहीं मिले। यहां कोई कुछ बताने वाला नहीं है। महिला वार्ड में पेसेंट छटपटा रही है। खून के लिए ना तो कोई फोन उठा रहा है और ना कोई सही जवाब दे रहा है।
चिकित्सा प्रभारी से पूछा जाएगा स्पष्टीकरण
ब्लड बैंक 24 घंटे खोलना है। किसी भी स्थिति में बंद नहीं रहना चाहिए। रविवार की शाम में 6:00 बजे के बाद ब्लड बैंक बंद मिला, इसके बारे में प्रभारी चिकित्सक से स्पष्टीकरण पूछेंगे। संबंधित नर्स, स्टाफ और टेक्नीशियन से भी इस मामले में पूछताछ होगी कि किसके कहने पर ब्लड बैंक बंद कर दिया गया था।
डा. यदुवंश शर्मा, सिविल सर्जन सीवान
घंटी बजती रही, नहीं उठा सचिव का नंबर
आश्चर्य तो यह रहा है मरीज अपनी समस्या बताने के लिए कई बार भारतीय रेडक्राॅस सोसाइटी के जिला सचिव रत्नेश प्रसाद सिंह को उनके मोबाइल नंबर पर फोन करता रहा। लेकिन, सचिव ने फाेन नहीं उठाया।
स्टाफ की शिफ्टिंग नहीं हो पाई थी, इसलिए दिक्कत हुई
किट उपलब्ध नहीं हो रही है। जिसकी ड्यूटी थी बिना सूचना दिए वह चला गया था। ब चौबीसों घंटे इसे चालू रखा जाता है। सही सूचना नहीं मिलने के कारण स्टाफ की शिफ्टिंग नहीं हो सकी थी। जो दोषी होंगे उसपर कार्रवाई होगी।
डॉ सौरभ सिंह, चिकित्सा प्रभारी, ब्लड बैंक
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