रोहतास जिले की चुनावी तासीर की थाह लेना फिलहाल मुश्किल है। जदयू-लोजपा-भाजपा की लड़ाई ने प्रत्याशियों की तो मुश्किल बढ़ाई ही है साथ ही मतदाताओं को भी असमंजस में डाल दिया है। काराकाट में माले भाजपा के सीटिंग विधायक को चुनौती दे रहा है। तो वहीं दिनारा में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने कार्यकर्ताओं को एनडीए के लिए काम करने को तैयार करना हो गया है।
चेनारी में लड़ाई निश्चित रूप से जदयू के लिए थोड़ी आसान होती यदि उनकी पुरानी सहयोगी लोजपा उनके खिलाफ मैदान में ना उतरती। बहरहाल पढ़ें, रोहतास जिले की जनता की मनोदशा और प्रत्याशियों के समीकरण की पड़ताल करती इन्द्रभूषण की रिपोर्ट
काराकाट: काडर वाली दो पार्टियों के बीच सीधा मुकाबला
काराकाट सीट पर काडर वाली दो पार्टियों के बीच सीधे मुकाबले में किसी और के लिए जगह नहीं दिखती। यहां भाजपा के उम्मीदवार राजेश्वर राज का सीधा मुकाबला माले के अरुण कुमार सिंह से है। हालांकि कुछ निर्दलीय और रालोसपा के उम्मीदवार भी मैदान में हैं पर भाजपा और माले के कैडर के बीच सीधे मुकाबले में होने से इस सीट पर किसी के लिए कोई गुंजाइश बची नहीं है।
राजेश्वर राज के लिए उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और अरुण कुमार सिंह के लिए माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य सभा कर चुके हैं। हालांकि, दो चुनाव से माले यहां लड़ाई से बाहर रहा है लेकिन इस बार राजद ने अपनी सीटिंग सीट माले को सौंपकर समीकरण रोचक बना दिया है।
माले का यहां कैडर वोट तो है ही, अरुण सिंह के कारण कुशवाहा वोट और राजद का साथ मिलने के कारण यादव और मुस्लिम वोट भी जुड़ता है। ये सभी मिलकर भाजपा के राजेश्वर राज के लिये बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
महिला वोटर आमतौर से परिवार की राय के साथ ही चलती हैं और उसी आधार पर वोट देती है।
मुद्दा जो लोगों की जुबान पर: माले समर्थकों के बीच सांप्रदायिकता और सामजिक न्याय पर बातचीत हो रही है। वहीं कई वर्गों के लिए माले का विरोध अपने आप में एक स्वतंत्र मुद्दा है। इस सब के बीच कहीं-कहीं बुनियादी जन सुविधाओं में जो काम हुआ है और नहीं हुआ है। उसकी भी चर्चा हो जाती है।
दिनारा: वोटों के बंटने या एकजुट रहने पर निर्भर है जीत
यूं तो दिनारा की सीट पर मुकाबला सीधा जदयू और राजद के बीच होना था। लेकिन 2015 में भाजपा के प्रत्याशी और अघोषित रूप से सीएम पद का चेहरा रहे राजेंद्र सिंह के लोजपा की टिकट से दावेदारी पेश करते ही मामला त्रिकोणिय और बेहद रोचक हो गया है। लोगों के मुताबिक अब मुकाबला सीधे जदयू के जय कुमार सिंह और राजेंद्र सिंह के बीच हो गया है।
2015 में राजेंद्र जय कुमार से 2691 वोटों से हार गए थे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि राजद के विजय मंडल पूरी तरह से रेस बाहर हो गए है। मतदान पैटर्न को लेकर एक थ्योरी दिनारा में जो चली रही है वह यह है कि जदयू-लोजपा की लड़ाई में यदि विजय अपने काडर वोट को बचाने में सक्षम हो जाते हैं तो उन्हें भी चुनाव में सफलता मिल सकती है। हालांकि एनडीए की चुनावी कमान अब भाजपा नेतृत्व ने दिनारा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को सौंप दी है।
महिला वोटर: यहां पर भी इनकी स्थिति अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। ज्यादा संभावना है कि ये परिवार के साथ ही वोट करेंगी।
मुद्दा जो लोगों की जुबान पर: राजेंद्र सिंह की उम्मीदवारी इस समय इलाके में सबसे बड़ा टाकिंग प्वाइंट है। लोग कोरोना में राजेन्द्र सिंह द्वारा किये गये काम भी याद कर रहें हैं। उनके लोगों में यह टीस है कि भाजपा नेतृत्व ने राजेन्द्र सिंह के साथ न्याय नहीं किया है। जय कुमार सिंह की सौम्यता को भी लोग सराह रहे हैं।
चेनारी: दो रविदास उम्मीदवार होने से जदयू को फायदा
चेनारी विधानसभा सीट पर 15 साल से ललन पासवान चुनाव की धुरी बने हुए हैं। चाहे जदयू से लड़ें, रालोसपा से लड़े या अन्य किसी दल के साथ हों। वो हारे या जीते लड़ाई में बने रहते हैं। जनता के लिए चेनारी से लेकर पटना विश्वविद्यालय के एससी-एसटी हॉस्टल तक दलित छात्रों के लिये उपलब्ध रहते हैं। यही कारण है कि वर्तमान विधायक ललन पासवान करीब 12 साल बाद फिर से जदयू के उम्मीदवार के रूप में चेनारी की जनता के सामने हैं।
उनकी लड़ाई इस बार कांग्रेस के मुरारी प्रसाद गौतम से है जो रविदास जाति से हैं। बसपा के उम्मीदवार श्याम बिहारी राम भी रविदास समुदाय से हैं। रविदास समुदाय के दो उम्मीदवार खड़े होने से ललन पासवान को फायदा हो सकता है। ललन पासवान के समर्थन में वीआईपी के मुकेश सहनी ने क्षेत्र में प्रचार भी किया है। यहां इस बार जो समीकरण बन रहे हैं उससे फिलहाल जदयू को बढ़त मिलती दिख रही है।
महिला वोटर: यहां तमाम मुद्दों के बीच सुविधाओं का विकास और सुरक्षा इनके लिए एक बड़ा मुद्दा है।
मुद्दा जो लोगों की जुबान पर: क्षेत्र में सड़क और पुल निर्माण के साथ बिजली की निरंतरता की चर्चा हो रही है। इसके अलावा जदयू-लोजपा-भाजपा की बीच पड़ी दरार को लेकर लोग तरह-तरह से बात कर रहे हैं। और इसको लेकर असमंजस की स्थिति है।
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