मधुबनी के बासाेपट्टी का बेलाैना गांव। बूथ के साथ विधानसभा क्षेत्र भी बदल गया है। बूथ अब चंपा टाेला में आ गया है। विधानसभा हरलाखी से खजाैली हाे गया है। यह वही बेलाैना गांव का बूथ है जहां 1980 में तीन-तीन बार पुनर्मतदान हुआ था। आप चाैंक गए हाेंगे। लेकिन यह सच है। कांग्रेस और कम्यूनिस्टाें के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का यह परिणाम था।
तब चुनाव आते ही सामाजिक कटुता बढ़ जाती थी। काॅमरेड व कांग्रेसी समर्थक आमने-सामने हाे जाते थे। गांव-गांव में चुनावी हिंसा हाेती थी। सामाजिक कटुता चरम पर था। इसे सुधरने में दशक बीत गए। पर, अब यह गांव सामाजिक समरसता की बानगी है। अब सबके मत का सम्मान है।
दलित-पिछड़ाें में भी चुनाव का अभिमान है। गांव के बिंदेश्वर ठाकुर कहते हैं कि सब अपनी मर्जी से वाेट डालते हैं। अब चुनावी वाद-प्रतिवाद भी लाेग खुले मन से करते हैं। पासवान बाहुल्य इस गांव में एक बार फिर जश्न के साथ चुनावी पर्व मनाने की तैयारी है। वाेट पर खूब चाेट पड़ेंगे। कांग्रेस, राजद व कम्युनिस्ट में जिस तरह चुनावी गठबंधन है, उसी तरह यहां के वाेटर भी एक हैं। वाेट किसी काे दें, हाेली-दीपावली एक साथ मनाते हैं।
विकास समेत अन्ये मुद्दे गाैण हैं, चुनावी गणित माैन है
शनिवार काे वाेटिंग हाेनी है। चुनाव प्रचार का गुरुवार को आखिरी दिन था। सबका चुनावी भाेंपू साथ-साथ बज रहा था। कहीं भाजपा के अरुण शंकर प्रसाद का चुनावी भाेंपू आगे ताे कहीं राजद के सीताराम यादव का भाेंपू। जाप के ब्रजकिशाेर यादव तथा निर्दलीय प्रत्याशी डाॅ. ए पी सिंह का भी भाेंपू इन सबके आगे-पीछे चल रहा था।
खजाैली का चुनावी गणित भी कुछ इसी तरह आगे-पीछे चल रहा है। मुख्य मुकाबला बीजेपी-राजद के बीच तय माना जा रहा है। पर, यहां 22 प्रत्याशी चुनावी मैदान में डटे हुए हैं। बासाेपट्टी के 15, खजाैली के 7 तथा जयनगर के 15 पंचायत तथा एक नगर पंचायत में खजाैली विस के लिए वाेटिंग हाेनी है। मुद्दा गाैण है। नेपाल सीमा से सटे हाेने के बावजूद इस क्षेत्र की कई प्रमुख सड़कें अब भी जर्जर है।
जयनगर में अाेवरब्रिज का निर्माण पूरा नहीं हाेने से एनएच-104 से एनएच-105 पर जाने के लिए दाे किलाेमीटर का यू टर्न लेना हाेता है। खुली सीमा हाेने के कारण कुछ युवा वर्ग तस्करी के धंधा में शामिल है। नेपाल जाने वाली ट्रेन जयनगर से ही खुलती है। पलायन काे देखते हुए जयनगर से देश के अधिकांश शहराें के लिए भी ट्रेनें खुलती है। असर यह कि यहां पुरुषाें से अधिक महिलाएं लाेकतंत्र के पर्व में हिस्सा लेती है।
सीपीआई-कांग्रेस के बाद भाजपा और राजद की झाेली में जाती रही है सीट
खजाैली में शिक्षक रहे 86 वर्षीय बामाशंकर प्रसाद सिंह कहते हैं कि इस इलाके के कई बड़े नेता पटना से लेकर दिल्ली तक पहुंचे। इस इलाके विधायक रहे माेहम्मद शकूर अहमद के पुत्र डाॅ. शकील अहमद केन्द्रीय मंत्री बने। सीपीआई-कांग्रेस के बाद अब राजद-भाजपा से विधायक बनते हैं।
1980 में सीपीआई के राम लखन राम रमन के बाद लगातार दाे टर्म कांग्रेस के बिलट पासवान विहंगम विधायक रहे। फिर, 1995 में सीपीआई से तथा 2000 में राजद से रामलखन राम रमन चुनाव जीते। 2005 तथा 2010 में यह सीट भाजपा की झाेली में रही।
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