कटिहार शहर का दिल है गांधी चौक। पिछली बारिश में यह पूरा इलाका और इसके आसपास के बाजार करीब एक महीने तक पानी में डूबे रहे। इसके अलावा शहर में तीन फ्लाईओवर (गोशाला, गांधी चौक, शरीफगंज) बनाने, जूट मिल चालू कराना, ड्रेनेज सिस्टम, बस स्टैंड शिफ्टिंग जैसे मुद्दे हवा में उड़ रहे हैं।
15 वर्ष से गोशाला फ्लाईओवर निर्माण को लेकर नेता वादे तो कर रहे हैं, लेकिन यह वादे तो मिट्टी के घरौंदे की तरह हर चुनाव में बनते हैं और बिखर जाते हैं। इस बार भी यह मुद्दे भी चुनाव में उछल रहे हैं। मनिहारी समेत कई सीटों पर बाढ़ से निजात, गंगा कटाव और विस्थापन चुनाव के मुद्दे को नेता उछाले जा रहे हैं, लेकिन लोगों के मिजाज बता रहा है कि इस बार के चुनाव में भी आखिरकार वोट जातिवाद और हिन्दू-मुस्लिम की बिसात पर डलेंगे।
हालांकि, वर्तमान सरकार के खिलाफ एंटी-इंकेंबसी फैक्टर भी बन रहा है। जिले की अन्य विधानसभा पर भी अपने-अपने मुद्दे और समीकरण बन रहे हैं। कहीं राजग और महागठबंधन में सीधा मुकाबला को लोजपा ने त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है तो कहीं स्थानीय उम्मीदवार का मुद्दा चुनाव को रोचक बना रहा है।
कटिहार: कटिहार विधानसभा क्षेत्र में राजग के भाजपा उम्मीदवार तारकिशोर प्रसाद एवं महागठबंधन उम्मीदवार डॉ. रामप्रकाश महतो के बीच सीधी टक्कर है। वर्तमान विधायक अपने 15 वर्ष के कार्यकाल का हवाला देकर आमलोगों से फिर से मौका देने की अपील कर रहे हैं तो महागठबंधन के उम्मीदवार अपने कार्यकाल के अधूरे विकास कार्य को पूरा करने का अवसर मांग रहे हैं।
प्राणपुर: यहां भाजपा उम्मीदवार दिवंगत मंत्री विनोद सिंह की पत्नी निशा सिंह और कांग्रेस के प्रत्याशी तौकिर आलम के बीच सीधी टक्कर होने के आसार पहले दिख रहे थे। लेकिन जब इशरत परवीन को कांग्रेस से टिकट नहीं मिली तो वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में है और मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। हालांकि, प्राणपुर में दिवंगत विनोद सिंह के नाम पर संवेदना मत भी उन्हें मिलने के आसार नजर आ रहे हैं।
मनिहारी: यहां अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीट है। यहां जदयू उम्मीदवार शंभू कुमार सुमन और निवर्तमान विधायक कांग्रेस प्रत्याशी मनोहर सिंह के बीच मुकाबला था। लोजपा ने राजग से अपना गठबंधन तोड़कर जदयू के खिलाफ लोजपा से अनिल उरांव को उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारकर मुकाबला को त्रिकोणीय बना दिया है। यहां कटाव और विस्थापन बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा है।
बरारी: बरारी विधानसभा में भी लोजपा से त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है। बरारी विधानसभा में राजद उम्मीदवार सह निवर्तमान विधायक नीरज यादव एवं जदयू उम्मीदवार विजय सिंह के बीच सीधी टक्कर थी, लेकिन भाजपा के बागी पूर्व विधायक विभाषचंद्र चौधरी ने लोजपा का दामन थाम लिया और मैदान में कूद पड़े और मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। माना यह भी जाता है कि लोजपा उम्मीदवार एवं राजद उम्मीदवार उसी विधानसभा के निवासी हैं, जबकि जदयू उम्मीदवार कटिहार शहर के निवासी हैं। चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार का मुद्दा भी छाया है, जिस कारण मुकाबला अधिक रोचक हो गया है।
बलरामपुर: बलरामपुर विधानसभा पूर्व से ही माले के लिए समर्पित माना जाता है। यही कारण है कि बलरामपुर विधानसभा के इतिहास में अब तक सबसे अधिक माले के प्रत्याशी ही विजयी रहे हैं। इसलिए इस बार भी बलरामपुर विधानसभा में माले के नेता महबूब आलम और राजग गठबंधन की वीआईपी पार्टी के उम्मीदवार वरूण झा में सीधा मुकाबला है। लेकिन वहां भी लोजपा ने अपना उम्मीदवार संगीता देवी को उतार कर मुकाबला को त्रिकोणीय बना दिया है।
कदवा: कदवा विधानसभा में निवर्तमान विधायक कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. शकील अहमद खान और जदयू उम्मीदवार सूरज प्रकाश राय के बीच मुकाबला माना जा रहा था। जब यहां भी लोजपा ने जदयू के खिलाफ उम्मीदवार के रूप में भाजपा के बागी डॉ. चंद्रभूषण ठाकुर को मैदान में उतार दिया तो त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है।
हालांकि, चंद्रभूषण ठाकुर पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी थे, लेकिन सीट शेयरिंग में कदवा विधानसभा जदयू कोटे में चले जाने के कारण चंद्रभूषण ठाकुर भाजपा के बागी हो गए और लोजपा का दामन थाम लिया।
कोढ़ा: कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीट है। इसलिए यहां भी कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर है। कांग्रेस से निवर्तमान विधायक पूनम पासवान एवं भाजपा के उम्मीदवार दिवंगत पूर्व विधायक महेश पासवान की पत्नी कविता देवी के बीच मुकाबला है।
हालांकि, यहां भी जन अधिकार पार्टी के उम्मीदवार वकील दास मुकाबले को रोचक बना सकते हैं, क्योंकि वकील दास प्रमुख के साथ साथ पंचायत प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं जिसका लाभ इस चुनाव वे उठाना चाहेंगे।
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