मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि बिहार विधानसभा के दो चरण के चुनाव अपेक्षाकृत अच्छे ढंग से संपन्न हो गए। कोराना महामारी के बीच चुनाव कराने का जब फैसला लिया गया तब खूब निंदा हुई। कहा गया कि ‘कयामत का दिन’ आ जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। 28 अक्टूबर और 3 नवंबर को हुई पोलिंग का औसत कमोबेश 2015 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव जैसा ही रहा।
इंटरनेशनल वर्चुअल विजिटर्स प्रोग्राम में अपने संबोधन में अरोड़ा ने कहा कि आयोग ने महामारी के बीच पहले राज्यसभा चुनाव करा कर स्थिति का आकलन किया। नतीजे उत्साहवर्द्धक निकले और उसी बुनियाद पर बिहार चुनाव कराने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में संशयवादियों, निंदकों की कमी नहीं, जो निर्णयों को कयामत का दिन जैसी उपमा से नवाजते हैं। ... लेकिन हालात बता रहे कि आयोग का निर्णय सही था। अब अंतिम चरण का मतदान 7 को है और नतीजे 10 को सामने आ जाएंगे। बिहार, दुनिया के सामने नजीर है कि चुनाव प्रबंधन संभालने वाली संस्थाएं महामारी के बीच भी चुनाव करा सकती हैं।
यहां बता दें कि कोरोना के कारण दुनिया के 60 देशों ने चुनाव टाल दिए। बाद के दिनों में श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, क्रोएशिया और मंगोलिया में चुनाव संपन्न हुए। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आयोग सभी चुनावों की बहुत ही बारीकी से योजना बनाता है। इस बार स्थिति थोड़ी अलग थी, कोरोना महामारी के बीच चुनाव कराने की चुनौती थी।
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