
शारदीय नवरात्र में शहर व गांवों के सभी मंदिर व पुजा पंडालों में मां दुर्गा के पहले स्वरुप शैलपुत्री की पूजा विधि विधान से हुई। पूजा के दाैरान सबसे पहले संकल्प, कलश स्थापना भगवान गणेश की पूजा हुई। इसके बाद दुर्गा सप्शती का पाठ किया गया। शाम में विशेष आरती के बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर पूजा पंडाल और मंदिरो में भक्ति काफी संख्या में उपस्थित रहे। मां शैलपुत्री की पूजा करने से सुख सम्पति की प्राप्ति होती है। नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। श्री महाबीर मंदिर रमना के पुजारी सुमन बाबा बताते है कि ब्रह्मचारिणी की पूजा हो रही है। मां का स्वरूप देवी सरस्वती का भी रूप माना गया है। इसलिए इनकी साधना और पूजा छात्रों के लिए बहुत भी लाभप्रद कहा जाता है। इनकी साधना से मेधा शक्ति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। देवी भाग्वत् पुराण में देवी ब्रह्मचारिणी नाम के पीछे देवी भाग्वत् पुराण में एक कथा है। दरअसल, जब मां शक्ति ने राजा हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को वर स्वरूप पाने के लिए तपस्या की। देवी की तपस्वी स्वरूप के कारण ही इनका नाम बह्मचारिणी और तपश्चारिणी हुआ। देवी ब्रह्मचारिणी ने इस स्वरूप में हजार वर्षों तक भोलेनाथ का ध्यान किया था। फिर कई हजार वर्षों तक तप के दौरान मां ने सिर्फ फल-फूल ग्रहण किए। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप सादा और सौम्य है।
नवदुर्गा मंदिर में कलशस्थापन करते श्रद्धालु।
इस मंत्र से करें मां का ध्यान
दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।
महावीर मंदिर में मां की आरती में जुटी भक्तों की भीड़
दूर्गा पूजा के अवसर पर श्री महाबीर मंदिर रमना, आरा में कलश स्थापना कर मां भगवती की पूजा की गई। मंदिर के पुजारी सुमन बाबा ने दुर्गा पाठ किया। संध्यापहर में मां की आरती की गई। अम्बे तु है जगदम्बे काली... आरती मुक्तेश्वर बाबा के द्वारा गाया गया। मंदिर प्रांगण में भक्तों की संख्या काफी थी। मौके पर आरा नगर निगम की मेयर रुबी तिवारी,श्री यज्ञनारायण तिवारी, संजय राय, शशिभूषण मिश्रा, वीरन्द्र सिंह व अन्य थे।
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