राष्ट्रकवि रामधारी सिंह का जयंती समारोह शहर के कई शिक्षण संस्थाओं सहित कई जगहों पर हुई। इस अवसर में भगिनी निवेदिता कन्या उच्च विद्यालय में जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में समारोह का आयोजन किया गया। अध्यक्षता रामचंद्र निठुर ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ दिनकर जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। अतिथि का स्वागत डाॅ.नंद जी दूबे ने किया। डाॅ. महेन्द्र राय ने कहा कि हिन्दी में दिनकर एक अतुलनीय कवि थे। दिनकर ने साहित्य को लोक कल्याणकारी बना दिया। इनके काव्य में उद्दत्रता सर्वत्र देखी जा सकता है। डाॅ.जवाहर लाल सिंह ने कहा कि दिनकर की कविता जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पढ़ा, सिंहासन खाली करो जनता आ रही है.. इस पर देश में आपात लग गया। उनके काव्य में वो ताकत थी। डाॅ.रविन्द्र नाथ राय ने कहा कि दिनकर की काव्य की प्रेरणा 1857 से लेकर 1930 तक का क्रांतिकारी परंपरा रही है। उन्होंने युग सत्य की बानी दी है। मौके पर जगतनंदन सहाय, मुक्तेशवर उपाध्याय, जगदीश कुमार सिंह, दिनेश राय, सीता देवी, किरण कुमारी, रिंकू श्रीवास्तव नीता सहाय, मधु कुमारी, वशिष्ठ मुनी प्रधान, वेंकटेश्वरामानुज, मधु मिश्रा व अन्य थे।

दिनकर जी में राष्ट्र भावना के शब्द संयोजन एवं प्रखरता भरने की विलक्षण प्रतिभा

इस क्रम में अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य समागम के तत्वाधान में पावरगंज स्थित शिवलोक भवन राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती मनाई गई। अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा पुष्कर व संचालन डाॅ.निर्मल कुमार सिंह ने किया। अध्यक्षीय भाषण में पुष्कर ने कहा कि दिनकर जी में राष्ट्र भावना के शब्द संयोजन एवं प्रखरता भरने की विलक्षण प्रतिभा थी। दिनकर जी की कालजयी रचनाएं रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, रसवंती युगाें-युगों तक याद किए जाएंगे। डाॅ.नवीन कुमार ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर का मूल स्वर विश्व मानवता का है। दिनकर की रचना कुरुक्षेत्र सात सर्गों में विभाजित महाभारत कालीन पौराणिक आख्यान को आधुनिकता के आईना में देखा है। मौके पर डाॅ.निर्मल कुमार सिंह, हृदयानंद राय, हरिद्वार प्रसाद किसलय, अखिलेश पुष्कर, रागोविन्द राय, सरिता कुमारी, डा केशव प्रसाद, रंजन प्रसाद, हरेराम उपाध्याय व अन्य थे।



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