अलौली प्रखंड के मध्य विद्यालय बुढ़वा की शिक्षिका सुप्रिया कुमारी को फर्जी तरीके से वेतन के भुगतान की जांच में लीपापोती की जा रही है। जबकि उक्त शिक्षिका को बिना कार्य किए ही वेतन का भुगतान किया जा रहा था। इसका खुलासा दैनिक भास्कर ने बीते माह 22 सितंबर और 14 अक्टूबर को किया था। मामले में डीएम के निर्देश पर जांच बैठाई गई। लेकिन वो सिर्फ खानापूर्ति के लिए साबित हो रही है। बता दें कि उक्त शिक्षिका सुप्रिया कुमारी को अलौली प्रखंड के पूर्व शिक्षा पदाधिकारी रामकुमार सिंह और पूर्व बीआरपी की मिलीभगत से अनुपस्थित रहने के बाद भी वेतन का भुगतान किया जा रहा था। बताया जाता है वेतन भुगतान के बदले अधिकारियों को वेतन का आधा हिस्सा दिया जाता था। सूत्रों की माने तो विभागीय अधिकारी कमीशन की चाह में जिले के करीब एक दर्जन से अधिक फरार शिक्षकों को सलाना करोड़ों रुपए का भुगतान कर रहा है।

वेतन भुगतान के बदले एक विद्यालय की हो रही है जांच : उक्त शिक्षिका पर जिस भी विद्यालय में रही वहां उनकी उपस्थिति नहीं बनाई गई थी। बताया जाता है कि शिक्षिका सूबे से बाहर रहती थी। और उनको वेतन दिया जा रहा था। इधर शिक्षिका को वेतन भुगतान के मामले में डीईओ द्वारा अलौली बीईओ को जांच का जिम्मा दिया गया है। लेकिन अलौली बीईओ की माने तो उनको सिर्फ एक विद्यालय का जांच का आदेश मिला है। साथ ही उनको वेतन से संबंधित जांच का निर्देश अप्राप्त है।

एचएम ने अपने स्कूल के उपस्थिति में अनुपस्थिति की दी रिपोर्ट : शिक्षिका को फर्जी तरीके से वेतन का भुगतान बड़ी ही सफाई से शिक्षा विभाग के द्वारा किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि शिक्षिका सुप्रिया को प्रतिनियोजित कर विभिन्न स्कूल में भेजा जाता था। जहां वह योगदान तो नहीं करती थी लेकिन उनके खाते में वेतन माह के अंत में पहुंच जाया करता था। आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो शिक्षा विभाग ने उक्त शिक्षिका को 158 माह में करीब 23 लाख 74 हजार रुपए का वेतन भुगतान किया है। जबकि शिक्षिका के विद्यालय की उपस्थिति पंजी में उसे अनुपस्थित बताया गया है। प्रतिनियोजन के खेल कर होता है फर्जीवाड़ा

शिक्षा विभाग में वैसे शिक्षकों का प्रतिनियोजन कर दिया जाता है जो अनुपस्थित रहते हुए वेतन का लाभ लेते हैं। बताया जाता है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से शिक्षकों के एक स्कूल से दूसरे स्कूल भेज उनके वेतन का बिना हेडमास्टर की उपस्थिति पंजी लिए भुगतान किया जाता है। कुछ इसी तरह फरार चल रही नियोजित शिक्षिका सुप्रिया कुमारी को अपने मूल विद्यालय मवि बुढ़वा से बार-बार प्रतिनियोजन कर ऐसे विद्यालय भेजा जाता रहा जहां विभागीय अधिकारी की नजर न पड़ेे। वर्ष 2006 में उनके नियोजन के बाद से उनको कई बार विभिन्न विद्यालय भेजा गया।

प्राथमिक विद्यालय बेतौना मुशहरी में अनुपस्थित रहने पर एचएम द्वारा लिखा मंतव्य।

डीईओ ने किया था वेतन बंद

बता दें कि शिक्षिका के अनुपस्थित रहने की सूचना पर 5 जुलाई को अलौली प्रखंड के बीईओ ने उनका प्राथमिक विद्यालय बेतौना से प्रतिनियोजन रद्द करते हुए उनको मूल स्थान प्रावि बुढ़वा में योगदान करने का निर्देश दिया था। लेकिन उन्होंने योगदान नहीं किया तो डीईओ ने 28 अगस्त को शिक्षिका को योगदान देने तथा उनका वेतन बंद करने का निर्देश दिया। बावजूद शिक्षा माफिया ने एक बार फिर जुलाई व अगस्त 2019 का वेतन एडवाइस स्थापना शाखा को भेज दिया था।

एक विद्यालय से उपस्थिति की हो रही है जांच

मामले में अलौली के बीईओ अरुण कुमार ने बताया कि उनको शिक्षिका के सिर्फ एक विद्यालय में उपस्थित रहने की जांच का निर्देश मिला है। वेतन भुगतान मामले की जांच वो नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैसे भी वेतन भुगतान का एडवाइस उनके पास नहीं है।

पूर्व बीईओ मामले में हैं दोषी

इधर डीईओ राजकिशोर सिंह ने बताया कि उक्त शिक्षिका सुप्रिया कुमारी के मामले में अभी तक पूर्व बीईओ अलौली दोषी पाये जा रहे हैं। इस मामले में उनकी नजर बनी हुई है। जितने भी दिन का वेतन उन्होंने प्राप्त किया है उसकी वसूली की जाएगी।



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Alauli News - education department flatters the instructions of senior officials action is taken in lieu

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