बिहार में पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा को साफ कर उपयोग लायक बनाने के साथ उससे जैविक खाद तैयार करने की ओर भोजपुर जिला में तेजी से कदम बढ़ाया जा रहा है। इसे लेकर आरा के चंदवा रिसोर्ट में भोजपुर जिला प्रशासन, यूनिसेफ व आईआईटी पटना के विशेषज्ञों के तत्वावधान में संयुक्त प्रशिक्षण दिया गया। बुधवार को जगदीशपुर और पीरो के पंचायत जनप्रतिनिधियों व कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें आईआईटी पटना के प्रोफेसर डॉ. सुब्रतो हैट ने बताया कि गीले पानी के साथ मल-मूत्र व अन्य कारणों से गंदा हुये तरल कचरा को साफ कर उपयोग लायक बनाने के लिए वेटलेंड तकनीक का उपयोग किया जायेगा। ठोस कचराें में गिले पदार्थों से केचुआ द्वारा वर्मी कम्पोस्ट विधि से जैविक खाद बनाया जायेगा। सूखे कचरों को, जो नष्ट होने के लायक नहीं रहते है, उसे घर-घर से एकत्र कर कबाड़ी या नगर निगम और नगर पंचायत प्रबंधन को प्रारंभ में सौंप दिया जायेगा। इससे आम लोगों को कचरे से मुक्ति के साथ आय भी प्राप्त होने लगेगी। डीडीसी अंशुल अग्रवाल ने ओडीएफ के बाद अगले चरण मे वैज्ञानिक तकनीक से कचर प्रबंधन की जानकारी दी। कहा कि इससे शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती दूरी को पाटने में भी मदद मिलेगी। स्वच्छ भारत मिशन के प्रेरक निखिल कुमार ने स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप देने पर बल दिया। मौके पर यूनिसेफ की रश्मि कुमारी, जगदीशपुर व पीरो के पंचायत जनप्रतिनिधियों के अलावे जीवीका से जुड़ी कई कर्मी मौजूद थे।

कैसे कार्य करेगी यह तकनीक

कचरों को उपयोग के लायक बनाने के लए आईआईटी के विशेषज्ञ वेटलेंड तकनीक का उपयोग करेंगे। इसमें कैना इंडिका नामक फूलनुमा पौधे का उपयोग किया जायेगा। सबसे पहले इस पौधे को लगाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में काफी कम जगह में ही कंक्रीट का बेड बनाया जायेगा। बेड के उपर कैना इंडिका नामक फूलनुमा पौधा पहले लगाया जायेगा। इसके बाद इसी पौधा का जड़ बेड के नीचे से गुजरने वाले तरल कचरों से सटता रहेगा। तरल कचरा के जड़ में सटन से उसकी गंदगी को जड़ उपर खिंच लेगा आैर पानी में मौजूद गंदगी साफ हो जायेगी।

प्रक्रिया में बिजली और मशीन का नहीं होगा उपयोग

वेटलैंड तकनीक में किसी भी प्रकार से बिजली और मशिनरी तंत्र का उपयोग नहीं होगी। इस तकनिक में नाम मात्र की राशि खर्च होगी। इससे किसानों को काफी लाभ होने के साथ जमीन का भूगर्भीय जलस्तर भी बढ़ेगा।

आर्थिक लाभ भी होगा : ठोस कचरों से केंचुआं द्वारा जैविक खाद बना पंचायत स्तर पर ही उसे बिक्री भी करने की योजना है। इससे किसानों को कम दाम पर खाद मिलने के साथ आर्थिक लाभ होने लगेगा। इस कारण गांव की माली हालत भी सुधरने लगेगी।



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Ara News - cleaning of dirty liquid waste from root of cana indica plant

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