
प्रारंभिक शिक्षक संघ, भोजपुर इकाई के तत्वावधान में मंगलवार को सांस्कृतिक भवन में जिला सम्मेलन हुआ। शुरुआत राजकीय आदर्श मध्य विद्यालय नवादा की बच्चियों द्वारा स्वागत गीत गाकर हुआ। प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू ने कहा कि आज के परिवेश में सरकार शिक्षकों को बदनाम करना चाहती है। सामाजिक रुप से शिक्षकों का स्तर घटता जा रहा है,जो चिंता का विषय है। सरकार गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की बात तो करती है। लेकिन शिक्षकों से शिक्षण कार्य के अलावा सभी कार्यों में लगाए रहती है। यह कार्यक्रम 2005 की कायरता पूर्ण घटना की 14 वी वर्षगांठ के रुप में किया गया। जब 2005 में लाठी चार्ज हुई तो जलियांवाला बाग की घटना की याद ताजा हो गई। हम इस संघर्ष दिवस को संकल्प दिवस के रूप में मनाते है। संघ द्वारा आहुत 13 जनवरी 2017 को जब आन्दोलन हुआ तो नियोजित शिक्षकों को सातवें वेतन की लाभ देने की घोषणा मुख्यमंत्री को करना पड़ा। पुनः 2020 में पूर्ण वेतनमान की लड़ाई लड़नी है। संघ अन्तिम समय तक सरकार से लड़ाई लड़ेगा और पूर्ण वेतनमान दिलाकर रहेगा। प्रदेश कोषाध्यक्ष अनवार करीम ने कहा कि संघ प्रत्येक वर्ष 24 दिसम्बर को संकल्प दिवस के रूप में मनाते है। सरकार अगर सही मायने में शिक्षकों को मान-सम्मान देना चाहती है तो समान काम - समान वेतन सहित सेवा-शर्त की घोषणा तत्काल करे। आज समाज में सरकार के वजह से हमारी प्रतिष्ठा गिर रही है। जिला परिषद उपाध्यक्ष फुलवंती देवी ने कहा कि शिक्षक ही सभी विभागों के निर्माता है और सरकार के द्वारा उन्हें ही प्रताड़ित किया जाता है। हम शिक्षक के हर आन्दोलन में सहयोग करने के लिए तैयार है। जिलाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह मंटू ने कहा कि सरकार बच्चों को शिक्षित नही,साक्षर बनाना चाहती है। गरीब के बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ते है,उनका विकास नही होने देना चाहती। जिला सम्मेलन के माध्यम से उपस्थित शिक्षकों ने संकल्प लिया कि 2020 में पूर्ण वेतनमान की लड़ाई प्रदीप कुमार पप्पू के नेतृत्व में आर-पार की होगी। अगर शिक्षकों की खोयी प्रतिष्ठा वापस लानी है तो सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखानी होगी। प्रधान सचिव राजेश कुमार सिंह व कोषाध्यक्ष धर्मेन्द्र प्रसाद ने कहा कि नियोजित शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ है। इन्ही के बदौलत शिक्षा की स्थिति में परिवर्तन हुआ है और सरकार आज इन्ही को प्रताड़ित कर रही है। संघ के द्वारा तिथियों को शॉल से सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में गायक रतन ने माे. रफी के कुछ गानों को गाकर शिक्षकों की तालियां बटोरी।
प्रारंभिक शिक्षक संघ के सम्मेलन को संबोधित करते वक्ता।
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