रुक-रुक कर बिन मौसम पूरी रात हुई बारिश से किसानों व ईंट व्यवसायियों को लाखों की क्षति हुई है। दरअसल जिले में गुरुवार की रात करीब 10 बजे से शुरू हुई बारिश के बाद लगातार हो रही बूंदाबांदी से जिले में फायदा कम नुकसान अधिक हुआ है। खेत- खलिहान में रखे गए धान की फसल भींगकर बर्बाद हो गए। खेतों में दलहन, तेलहन के अलावे गेंहु के पौधों को भी नुकसान हुआ है। सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 19 एमएम बारिश हुई। सर्वाधिक बारिश भभुआ प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में हुई है। इसी तरह भगवानपुर व चैनपुर, नुआंव, रामगढ़ में भी पहाड़ी प्रखंड अधौरा व दुर्गावती के हिस्से में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है। जाहिर है जिस क्षेत्रों में अधिक बारिश हुई है वहां नुकसान भी अधिक हुआ है।कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि बिना मौसम बारिश से फायदे कम नुकसान अधिक हुआ है। बारिश से जिले में मौसम के मिजाज में भी बदलाव हुआ है। ठंड बढ़ने से उनी कपड़ों की डिमांड बढ़ी है। बारिश से ठंड बढ़ने से शुक्रवार को दिनभर लोग घरों में ही दुबके रहे। मुख्यालय के सड़को पर भी सन्नाटा रहा। जगह-जगह जलजमाव भी है। उधर, खेत खलिहान में धान की फसल भींग गई। इससे किसानों को बड़ी क्षति हुई है।कहीं-कहीं तो खेतों में नमी होने के बावजूद बारिश के चलते मिट्टी की नमी और भी बढ़ गई है। इससे रबी फसल की बुआई में परेशानी सामने आ गई है। मन जा रहा है कि बुआई में देर होगी इससे रबी का उत्पादन भी प्रभावित होगा।

बारिश से जिले में मौसम में भी हुआ है बदलाव, ठंड भी बढ़ने से उनी कपड़ों की बढ़ी डिमांड

बारिश के पानी से खलिहान में रखा धान से पानी को बाहर निकालता किसान

रबी फसल को प्रतिरक्षण| भभुआ| रबी फसल को भारी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। खेतो में पानी का जमाव हो गए है। फसल को इससे बचाव के लिए किसानों को पोटाश का छिड़काव करना चाहिए। इससे पौधे को प्रतिरोधकता व प्रतिरक्षण मिलता है। केवीके अधौरा के कृषि वैज्ञानिक अमित कुमार में बताया कि रबी फसल की जड़ो में बारिश से जलजमाव हो गया हो तो किसान पोटास का छिड़काव करें। लम मात्रा में यूरिया का भी छिड़काव करें।

धान की कटनी भी नहीं हो सकी है

किसानों की मानें तो जिले के उत्तरी हिस्से के कई प्रखंडों में अभी तक खेतों में पड़ी धान की कटनी भी नहीं हो सकी है। ऐसे में बारिश के चलते कृषि कार्य फिलहाल थम सी गई है। किसान धूप निकलने की आस में बैठे हुए हैं। बताया जा रहा है कि जिले के ज्यादातर हिस्सों में अभी गेहूं की फसल नहीं लगाई जा सकी है।

जिले में बेमौसम की बरसात ने तोड़ी किसानों की कमर, खेतों में लगी धान की फसल हुई बर्बाद

रामगढ़/मोहनिया| बेमौसम की बारिश की वजह से मोहनिया अनुमंडल क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। अनुमंडल इलाके के रामगढ़ प्रखण्ड क्षेत्र के किसानों की कमर टूट गई है। पहले प्रशासन के फरमान की वजह से हार्वेस्टर से धान की कटाई पर रोक लगाई गई। इसके बाद किसी तरह से कुछ किसानों ने मजदूरों से धान की कटनी कराई। हाथ से काटे गए धान के पौधे अभी खेतों में ही पड़े हुए थे कि गुरुवार की रात से आफत बन कर हुई बारिश की वजह से खेतों में पड़े धान के पौधे पानी से बुरी तरह भींग गए हैं। कई खेतों में तो धान के पौधे पानी में डूब गए। उन्हें वहां से उठाकर खलिहान तक लाना मुश्किल हो गया है। हालों कि कई किसानों ने कटनी के बाद धान के बोझे खलिहानों में रखने के बाद गेंहू की बुवाई शुरू कर दी है। अगर वे धान कटनी के चक्कर में पड़ेंगे तो खेतों की मिट्‌टी सूख जाएगी और तब गेंहू की बुवाई मुश्किल हो जाएगी।

विभाग के आंकड़े

प्रखंड बारिश(मीमी)

अधौरा 5.4

भभुआ 36. 2

भगवानपुर 26. 4

चैनपुर 28. 6

चांद 19.2

दुर्गावती 4.8

कुदरा 15.2

मोहनिया 6.2

नुआंव 26.4

रामगढ़ 32. 4

रामपुर 4.8

रामगढ़ इलाके में ईंटभट्ठे में बारिश से नुकसान का दृश्य।

जिले में संचालित ईंट उद्योग को भी हुआ है काफी नुकसान, लाखों की ईंटें बर्बाद

वहीं दूसरी तरफ जिले में गुरुवार रात की बारिश ने जिला मुख्यालय समेत रामगढ़ प्रखण्ड के ईंट भट्ठा संचालकों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। नए पाथे गए लाखों की ईंटें बारिश के पानी से गल कर बर्बाद हो गईं। ईंट उद्योग से जुड़े प्रखण्ड के व्यवसायी मनोज सिंह, अभय सिंह, मनीष कुमार, बिट्टू कुमार ने बताया कि कई जगहों पर ईंटों को पकाने का काम शुरू हो चुका है तो कहीं एक दो दिनों में शुरू होने वाला था। 14 दिसम्बर से खरमास शुरू हो जाता है। इसलिए चिमनी मालिकों का प्रयास रहता है कि इसके पहले ही ईंटों की पकाई का काम शुरू करा दिया जाय। लेकिन बारिश की वजह से अब इस कार्य में बिलम्ब होने की उम्मीद बढ़ गई है। वहीं लाखों कच्चे इट गल चुके हैं। ईंटों की पथाई करने वाले मजदूरों को भी नुकसान झेलना पड़ा है। बारिश की पानी से गली हुई ईंटों की पकाई भी नही की जा सकती है। अभी तो बारिश हुई है। शीतलहर का प्रकोप बाकी है। अगर मौसम में इसी तरह का बदलाव होता रहा तो ईंटों की कीमत में भी उछाल आ सकती है।



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Bhabhua News - intermittent rain all night loss of lakhs to farmers and brick traders
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