जिले के प्राथमिक शिक्षा के संसाधनों का बजट 200 करोड़ रुपया से ज्यादा का है, लेकिन 114 स्कूलों में बेंच-डेस्क तो दूर बैठने के लिए दरी तक नहीं है। इसके अलावा सत्र बदलने के बाद बजने वाली घंटी भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। स्कूल भवन, पोशाक, साइकिल, छात्रवृत्ति समेत अन्य मदों के लिए सरकार अलग-अलग योजनाएं चला रही हैं। इसके बावजूद अररिया के स्कूलों में जमीनी स्तर पर विकास नहीं हो रहा है। इसका खुलासा जिला पदाधिकारी की जांच में हुआ है। इस तरह की रिपोर्ट आने के बाद जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि भारत सरकार के 115 अति पिछड़े जिलों में अररिया भी शामिल है। नीति आयोग के तहत जिले में शिक्षा क्षेत्र के गुणात्मक सुधार के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम और आयोजन किए जा रहे हैं।

डीएम बैद्यनाथ यादव स्कूलों में सुधार के लगातार प्रयासरत हैं। पिछले दिनों उन्होंने जिला स्तर पर नीति आयोग के कर्मचारियों के साथ मिलकर स्कूलों में नए तरीके से निरीक्षण का शेड्यूल तैयार किया था। इसमें उन्होंने एक साथ अलग-अलग सत्र में अलग-अलग जांचकर्ता को स्कूल भेजना शुरू किया। 22 से 26 नवंबर के बीच कराई गई जांच के बाद जो रिपोर्ट शिक्षा विभाग को दी गई है, उसके अनुसार जिले के 114 विद्यालयों में बच्चों को बैठने के लिए बेंच-डेस्क दरी या तिरपाल तक नहीं है। वह सभी बच्चे आज भी अपने घर से बोरे लाकर ही लेकर बैठते हैं।

विडंबना डीएम की जांच में हुआ खुलासा, 22 से 26 नवंबर तक हुई थी जांच

घर से बोरी लाकर या स्कूल में जमीन पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं बच्चे

01 से हजार से अधिक नामांकन वाले स्कूलों को 1 लाख 25 हजार दिया जाता है

सामुदायिक भवन में संचालित प्राथमिक विद्यालय जहांगीर टोला में जमीन पर बैठे बच्चे(फ़ाइल)।

विकास मद की राशि का क्या करता है स्कूल प्रबंधन

शिक्षा विभाग ने हर साल सरकारी विद्यालयों में नामांकन के आधार पर स्कूल के विकास और स्वच्छता मद में राशि दी जाती है। इसके अलावा स्कूल में बच्चों के नामांकन शुल्क में भी विकास की राशि वसूल की जाती है तो ऐसे में स्कूल प्रशासन उस राशि का क्या करता है।

22 से 25 नवंबर तक कराई गई विद्यालयों की जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेजी गई

किस प्रखंड में कितने स्कूल

प्रखंड बिना घंटी बिना तिरपाल

अररिया 34 13

नरपतगंज 01 13

पलासी 13 10

रानीगंज 20 16

फारबिसगंज 03 09

जोकीहाट 25 25

सिकटी 00 04

कुर्साकांटा 06 06

भरगामा 12 18

नामांकन के आधार पर हर साल मिलती है टीएलएम की राशि

सर्वशिक्षा अभियान शुरू होने के बाद से अब तक हर साल प्रत्येक सरकारी विद्यालयों में नामांकन के आधार पर कंपोजिट ग्रांट की राशि दी जाती है। इस राशि को टीएलएम भी कहा जाता है। एक सरकारी विद्यालय में एक से 200 नामांकन तक 50 हजार रुपया, 200 से 499 नामांकन तक 75 हजार रुपया, 500 से 999 बच्चे नामांकन तक 75 हजार और एक हजार से अधिक नामांकन वाले स्कूल को 1 लाख 25 हजार रुपया दिया जाता है। नियम के अनुसार इस राशि का 10 फीसदी स्वच्छता मद में खर्च किया जाना है। शेष पैसे से तो स्कूल का विकास, सामग्री क्रय, लाउडस्पीकर खरीद होनी है। इसके बावजूद जिले के 114 स्कूलों में घंटी नहीं होना, 114 स्कूलों में तिरपाल, दरी नहीं होना विभागीय मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़ा करता है।

बीईओ से मांगी है रिपोर्ट

व्यवस्था में सुधार के लिए एसएसए डीपीओ स्तर से सभी बीईओ को पत्र जारी किया है। सभी बीईओ कहा गया है कि आवश्यक कार्रवाई कर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। एक बार फिर सत्यापन कराया जाएगा। अशोक कुमार मिश्रा, डीईओ, अररिया



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Araria News - annual budget of primary education 200 crores not even bench desk in 114 schools

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