अधौरा के बड़वान कला गांव की बंजर भूमि पर लगाए गए फलदार पौधे
इन पौधों पर शोध भी किए जा रहे हैं
बता दें कि नाबार्ड व क्षेत्र के वनवासियों के समन्वय से लगाए गए पौधों पर शोध भी किए जा रहे हैं। ऐसे में इन्हें प्रतिस्थापित कर दूसरे पौधे भी लगाए जाएंगे। नाबार्ड कार्यालय के आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सरकार की नीति के तहत वनवासियों को चिन्हित कर उनके आय में वृद्धि के लिए यह पहल की गई है। ताकि वनवासियों का पलायन रोका जा सके।
दूसरी इमारती लकड़ी के पौधे भी लगाए जाएंगे
बताया गया है कि पहले चरण के तहत एक क्लस्टर में 442 एकड़ बंजर भूमि में यह पौधरोपण की गई। दूसरे चरण में 440 एकड़ में फलदार वृक्षों के साथ इमारती लकड़ियों के पौधे भी लगाए जाएंगे। जिनमें प्रति एकड़ 80 फलदार पौधे के अलावे इमारती लकड़ियों में सागवान, शीशम, महोगनी, बांस भी लगेंगे।
सृजन के साथ वन वासियों का रुकेगा पलायन
राष्ट्रीय कृषि विकास बैंक के प्रबंधक उदयन ने कहा कि वनवासियों की पलायन रोकने के साथ उनकी आय वृद्धि के लिए यह पहल की गई। पहले चरण में चिन्हित किए गए किसानों के बंजर खेतों मे पौधरोपण किए गए। 60 से 70 फीसद सफलता मिली है। यह ऐसे फलदार पौधे हैं, जो पौधरोपण के 3 सालों बाद फल देने लगते हैं।
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