जापान की इस तकनीक के तहत छोटे अंतराल में किसी जगह पर बहुत सारे स्थानीय प्रजाति के पौधे लगाने पर फोकस किया जाता है, जिससे जंगल विकसित हो सके। नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संदीप कुमार ने शुक्रवार को बताया कि मियावाकी तकनीक का नाम प्लांट इकोलॉजिस्ट और बोटानिस्ट अकीरा मियावाकी के नाम पर रखा गया है। इस तकनीक में पौधों की तेजी से प्रगति के लिए मिश्रित प्रजाति के पौधे एक साथ लगाए जाते हैं। इस पौधारोपण प्रक्रिया की शुरुआत कार्यालय के पास खाली जमीन व प्रखंड मुख्यालय स्थित नर्सरी से शुरू किया जाएगा।
इसके बाद इस तकनीक का इस्तेमाल नगर पंचायत क्षेत्र के अन्य जगहों में किया जाएगा। इसके लिए टीम गठित की गई है, जो नई टीम इस कार्य को भी देखेगी। कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि वायो जैव विविधता समिति का गठन किया गया है। जिसके अध्यक्ष पूर्व पार्षद बंगाली राम व इनके साथ छह सदस्य रेखा कुमारी, गायत्री देवी, मिथिलेश कुमार सिन्हा, दुःखी महतो, ज्वाला नट, रामनारायण महतो हैं। इनका कार्य नगर पंचायत के पंजी का संधारण, जैव विविधता सम्बन्धी सूचनाएं अंकित करना है।
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