कोरोना के संक्रमण बढ़ने के बाद सदर अस्पताल में मरीजों को कहां रखें या न रखें यह बहुत बड़ी समस्या हो गई है। यहां तक कि सदर अस्पताल क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद भी यहां वार्ड की कमी हो गई है। अस्पताल में डायरिया, डेंगू या अन्य प्रकार के संक्रमित मरीजों के लिए अलग से वार्ड नहीं है। डायरिया के मरीजों को पुरूष मेडिकल वार्ड में ही शिफ्ट कर दिया गया है।
यहां तक कि इसी पुरूष मेडिकल वार्ड में ही पुरूष व महिला डायरिया मरीजों को रखा जाता है। मेडिकल वार्ड में गंभीर रोग से ग्रसित रोगियों का इलाज होता है। इन मरीजों को संक्रमण से काफी खतरा बढ़ सकता है। लेकिन संक्रमण रोग डायरिया के रोगियों को भी इसी वार्ड में भर्ती होने से सामान्य रोग के रोगी भी संक्रमित होने का खतरा बना रहता है।
मेडिकल कॉलेज बनने के कारण जगह की है कमी : सदर अस्पताल में इन दिनों मेडिकल कॉलेज का निर्माण काम चल रहा है। जिस से दर्जनों भवन को तोड़ कर वहां नया भवन निर्माण किया जा रहा है। अस्पताल में भवन की कमी के कारण अब मरीजों को रखने और उसका इलाज करने की समस्या बढ़ गई है। भवन की कमी के कारण एक ही वार्ड में कई तरह के बीमारी से ग्रसित रोगियों को रख कर इलाज किया जा रहा है।
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