देश में लॉकडाउन जारी है। इसे लेकर सरकार, प्रशासन व उसकी टीम दिन-रात एक कर आम-आवाम की सेवा में लगी हुई है। इसी क्रम में कोरोना के खिलाफ इस जंग में बाल विकास परियोजना से संबंधित विभिन्न आंगनबाड़ी सेविकाएं भी धरातल पर अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं। आंगनबाड़ी सेविकाएं जहां एक तरफ घर-घर जाकर प्रवासी व स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य कर्मी के साथ मिलकर स्वास्थ्य सर्वे कर रही हैं ताे वहीं अपने-अपने पोषक क्षेत्र के बच्चों, किशोरियों और महिलाओं के पाेषण का भी ख्याल रख रही हैं। इस क्रम में सेविकाओं द्वारा लॉकडाउन में केंद्रो के बंद रहने से आ रही परेशानी को लेकर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ महिला और केंद्र के बच्चों को सूखा पोषाहार उपलब्ध करा रही हैं।

जिले में 3622 आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है
इस संबंध में डीपीओ आइसीडीएस कुमारी पुष्पा ने बताया कि जिला में कुल 3622 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। सभी केंद्रों के पोषक क्षेत्र की प्रथम बार गर्भवती महिला को प्रधानमंत्री मातृत्व योजना के तहत पांच हजार और मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत एक परिवार की दो वर्ष तक की दो बच्चियों को दो हजार रुपए और आधार पंजीकरण के बाद एक हजार रुपये ऊपर से दिया जाना है। उन्होंने इसके लिए पोषक क्षेत्र के लाभुकों को संबधित सेविका से संपर्क करने की अपील की। बताया कि ये सेविकाएं घर-घर जाकर कोरोना को लेकर लोगों का सर्वे कर रही है।
सुधा दूध पाउडर का किया जा रहा वितरण
वहीं स्कूल पूर्व शिक्षा में शामिल बच्चों के बीच सुधा दूध पाउडर के पैकेट का वितरण कर रही है। सेविकाओं द्वारा जागरूकता के तहत लोगों को कोरोना वायरस से बचाव अाैर बच्चों में चमकी बुखार के लक्षण की जानकारी दी जा रही है।



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