लॉकडाउन के कारण अपना रोजगार गंवा चुके प्रवासियों का घर आगमन किसी लंबी यातना से कम नहीं है। सैकड़ों की संख्या में जिले के अलावा दूसरे जिले के प्रवासी श्रमिक सहरसा स्टेडियम पहुंच रहे है। किसी को सीधी रेल सेवा का लाभ मिला तो कोई पैदल एवं ट्रक के सहारे सीमावर्ती क्षेत्र तक पहुंचे। इन प्रवासी श्रमिकों को बस द्वारा स्टेडियम परिसर लाकर वहां से संबंधित प्रखंड एवं जिला मुख्यालय भेजने की व्यवस्था की गई है। स्टेडियम परिसर में प्रवासियों को ठहरने के शामियाना लगाया गया है एवं खाने की व्यवस्था भी की गई है लेकिन कई प्रवासियों ने स्टेडियम परिसर में बने अस्थायी शौचालय को लेकर परेशान दिखे।
राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित असंगठित क्षेत्र के मजदूर हुए हैं। जिले सहित कोसी इलाके के लाखों श्रमिक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब एवं अन्य प्रदेशों में असंगठित क्षेत्रों में ही काम करते हैं। लॉकडाउन होने के कारण रोजगार बंद होने से ये प्रवासी श्रमिक किसी न किसी प्रकार घर पहुंचने का जहमत उठा रहें हैं। किसी को सीधी रेल सेवा का लाभ मिल रहा है तो कई अन्य पैदल एवं ट्रक से राज्य के बार्डर पर पहुंच रहें हैं, जहां से उन्हें सड़क मार्ग से स्टेडियम परिसर लाया जा रहा है। स्टेडियम परिसर स्थित वाहन कोषांग में स्वास्थ जांच के उपरांत प्रवासियों को संबंधित जिला एवं प्रखंड मुख्यालय भेजने की व्यवस्था की गई है। स्टेडियम परिसर में गुरुवार सुबह के 8.30 बजे प्रवासियों को खाना में चावल, दाल एवं सब्जी परोसा जा रहा था। खाना पाने के लिए प्रवासियों की लंबी लाइन देखी गई। खाना खा रहे सोनबरसा प्रखंड के मधेपुरा सरौनी गांव निवासी पप्पू यादव ने कहा कि रात में कटिहार स्टेशन पर सिर्फ एक पैकेट बिस्किट दिया गया, वही खाकर हूं। रास्ते में मिलनेवाले खाने के बारे में पप्पू ने बताया कि बरौनी स्टेशन पर बुधवार को दिन के करीब 2 बजे हल्का सा नमकीन चावल दिया गया था।



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