जिले के मखदुमपुर प्रखंड के वाणावर पहाड़ी की चोटी पर स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ के प्रसिद्ध मंदिर के सभी रास्तों में भक्तों पर इस साल कोरोना की वजह से पहरा लगा दिया गया है। दरअसल इतिहास में यह पहला मौका है, जब सावन में वाणावर के प्रसिद्ध बाबा सिद्धेश्वरनाथ के मंदिर में श्रद्धालुओं के आने जाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा है।
गौरतलब हो कि नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण इस प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटक स्थल हर साल सावन के पूरे महीने श्रावणी मेला लगता था और न सिर्फ जिले के बल्कि पूरे प्रदेश से श्रद्धालु आकर बाबा सिद्धेश्वरनाथ पर जलाभिषेक कर अपने लिए मनोवांछित फल की कामना करते थे। गत वर्ष जहां प्रथम सोमवारी को वहां लगभग अस्सी हजार श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया था, इस साल सावन के प्रथम दिन के सोमवार पर वहां सन्नाटा पसरा था। मंदिर जाने के सभी प्रमुख रास्तों को जिला प्रशासन के निर्देश पर बैरिकेडिंग कर घेर दिया गया है। साथ ही वहां हर रास्ते पर पर्याप्त संख्या में पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट का पहरा लगा है।
वैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक कर सिद्ध होने के लिए दूर-दूर से आते थे श्रद्धालु
बाबा सिद्धेश्वरनाथ के मंदिर की महिमा के बारे में ऐसी मान्यता है कि सावन में यहां जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। साथ ही अन्य मंदिरों में दर्शन के बाद अंत में यहां आने के बाद ही पूर्ण सिद्धी भी प्राप्त होती है। इन मान्यताओं के आलोक में प्रतिवर्ष सावन में यहां पूरे प्रदेश से लोग जलाभिषेक को आते रहे हैं। फतुहा स्थित गंगा नदी के पवित्र जल के साथ हर साल यहां कांवर लेकर भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते थे लेकिन कोरोना के संक्रमण के भय से इस साल यहां मंदिर प्रबंधन कमेटी की अनुशंसा पर जिला प्रशासन ने व्यापक श्रद्धालुओं के हित को देखते हुए श्रावणी मेले के आयोजन को प्रतिबंधित करते हुए बाबा के दर्शन पर भी रोक लगा दी। कुल मिलाकर इस साल यहां का माहौल एकदम बदला-बदला सा लग रहा है। गत वर्ष श्रद्धालुओं की अपार भीड़ की जगह इस साल बाबा के महिमायी दरबार में सावन में सन्नाटा पसरा है।
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