सावन का बरसना लगातार जारी है। सावन के दूसरे दिन भी शहर और गांव में तेज बारिश हुई। आसमान में छाये घटाटोप बादलों ने कहीं झूमकर तो कहीं रिमझिम बारिश कर लोगों के प्यासे तन-मन को शीतल कर दिया। लोग आवश्यक कार्यवश छाता लेकर घरों से बाहर निकले और अपना काम किया। कई दिनों से भगवान भास्कर की तपिश और गर्मी झेलते-झेलते मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे भी आतप्त हो चले थे।
मंगलवार को सुबह से हुई बारिश और सुहाने मौसम ने सबको जैसे संजीवनी प्रदान कर दी। किसानों के चित्त हरिया गये तो तो खेतों में डाली गई धान की नर्सरी भी खिल उठी। प्रसन्न मन से किसान खेतों की ओर चल दिये। मंगलवार को मौसम सुबह से ही बारिश के अनुकूल बना हुआ था और दोपहर होते-होते मूसलाधार बारिश शुरू हो गई।
लोगों ने इसे मानसून का आगमन मान जी खोलकर इसका स्वागत किया। बहुत से युवाओं, किशोरों व बुजुर्गो ने भी बारिश में भींगकर मौसम का मजा लिया। बुजुर्गों ने इसे सावन का बढि़या आगाज बताया।
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