कोरोना को लेकर हुए लॉकडाउन में बेरोजगार हुए मजदूरों को नियमित रोजगार देने के लिए सरकार ने मनरेगा योजनाओं के तहत रोजगार देने का वायदा किया था। सरकार के द्वारा लाखों मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के दावे भी किये गए। कुछ योजनाएं धरातल पर उतरी और कुछ फाइलों में दबी रह गयी। मनरेगा में लूट की शिकायतें अधिकारियों से लेकर मीडिया तक की गयी। अधिकारी उन शिकायतों की जांच के लिए आनन-फानन में जिले में टीम बनाकर जांच भी कराई।

स्थानीय लोगों ने कहा था कि जांच ऐसे वक्त कराई गयी है जब बरसात प्रारम्भ हो गया है और गड्ढे , तालाब में पानी भर गए थे। मनरेगा की योजनाओं में जेसीबी से काम कराकर जॉब कार्ड में फ़र्ज़ी काम दिखाकर बिचौलिये के द्वारा राशि हड़पने की बात की शिकायत अधिकारी से की गयी थी लेकिन परिणाम आशंका के अनुरूप ही आया। जांच में कही भी किसी तरह की अनियमितता की बात नहीं आ सकी। इस संबंध में डीडीसी ने कहा कि हर जगह से जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गयी है और कार्य संतोषजनक है।

हालांकि हकीकत जानना है तो अभी भी ग्रामीणों से पूछा जा सकता है। जांच टीम में लगे कई अधिकारियों ने नाम छापने से इंकार करते हुए कहा कि जांच महज खानापूर्ति है और घोटाले पर पर्दा डालने के लिए कागज तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मिटटी के कार्यों की जांच सूखे में होती है जबकि हर जगह मिटटी खुदाई वालों जगहों दो फीट से लेकर चार फीट तक पानी भर गए थे। उन्होंने कई तस्वीर भी शेयर की है। इस सम्बन्ध में बता दे कि मनरेगा में मची लूट की खबर दैनिक भास्कर ने शिकायत के आधार पर पहले भी प्रकाशित की गई है और उसके आलोक में जांच टीम भी गठित हुई थी।



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