गांधीजी दुखी व पीड़ित का उद्धार चाहते थे। उनके मानवता के सिद्धांत को किसी राष्ट्र की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। गांधी द्वारा दिए गए विकास के मॉडल पर चलकर ही अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाया जा सकता है। ये बातें रविवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोसाइटी फॉर इंपावरमेंट, पटना की ओर से समकालीन परिदृश्य में वैश्विक शांति के लिए महात्मा गांधी की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन करने के बाद कहीं। गांधीवादी इतिहासकार भैरव लाल दास ने कहा- जून, 1921 के यंग इंडिया नवंबर 1921 में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में प्रस्ताव पारित करवाकर यह स्पष्ट संदेश दे दिया था कि अंग्रेज सरकार द्वारा बनाई गई विदेश नीति भारतीय नागरिकों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। वेबिनार को इजरायल के गांधीवादी दार्शनिक ओलेक नेट्जर, अमेरिका के प्रो. विलियम वेस्टयरमैन, गुजरात विद्यापीठ की प्रो. भद्रा सेवई और झारखंड सरकार के पूर्व सचिव एसके पांडेय ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजशास्त्री डॉ. एस नारायण ने की।
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