दानपुर के पीपापुल घाट से कासिमचक दियारा जा रही नाव गंगा की बीच मझधार में फंस गई। तेज हवा की वजह से बीच नदी में नाव हिचकोला खाने लगी। हालत ऐसी हाे गई थी नाव अब डूब जाएगा और नाव बीच गंगा में पलट जाएगी पर बच गई। नाव में 25 लाेग सवार थे। जिस वक्त नदी की तेज धारा में नाव डाेल रही थी ताे उस वक्त उसपर सवार लाेगाें की सांसें अटकी हुई थीं। बाद में नाव मझधार से निकल गई और सभी लाेग कासिमचक दियारा पहुंच गए। बावजूद प्रशासन काे इसकी भनक तक नहीं लगी। दानापुर बीडीओ ने बताया कि उन्हें इस तरह की काेई सूचना नहीं है।
नहीं हाेती गंगा घाटाें पर प्रशासन की पेट्राेलिंग
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओवरलाेडिंग नाव काे गंगा में चलाने के लिए प्रशासन क्याें नहीं राेक लगाती है। प्रशासन गंगा के घाटाें में पेट्रोलिंग क्याें नहीं करती। जब बारिश या तेज हवा हाे ताे कैसे नाव घाटाें से दियारा की ओर क्षमता से अधिक लाेगाें काे लेकर चली जाती है। यह हाल केवल दानापुर तक ही सीमित नहीं है कि बल्कि जिले में गंगा के किनारे पड़ने वाले कमोबेश सभी घाटाें की है। अगर लापरवाही रही ताे किसी भी दिन बड़ा हादसा हाे सकता है।
ओवरलोडिंग नहीं करने का निर्देश
बीडीओ व थानाध्यक्ष ने नासरीगंज घाट का शनिवार को निरीक्षण किया। दानापुर में बीडीओ ने नाविकों को सख्त निर्देश दिया कि ओवरलोडिंग नाव का परिचालन नहीं होगा। इस नियम का उल्लंघन करने वाले नाविकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिन नावों का रजिस्ट्रेशन कराया गया है उन्हीं नावों का परिचालन होगा। जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है वैसे नाविक अविलंब रजिस्ट्रेशन कराएं अन्यथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई हाेगी। पीपा पुल खुलने के बाद दियारा में आने जाने के लिए एकमात्र सहारा नाव है। दानापुर के लगभग आधा दर्जन घाटों से दियारा के लिए नावों का परिचालन होता है। ऐसे में अधिकांश नाव पर नाविकों द्वारा ओवरलोडिंग किया जाता है। कई दफे तो ऐसा भी देखा गया है कि नाव पर जानवर वाहन और आदमी को लोड कर एक साथ परिचालन किया जाता है। ऐसे में दुर्घटना की संभावना हमेशा बनी रहती है।
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