गंगा के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव का दंश बरियारपुर प्रखंड के बाढ़ से प्रभावित कई गांव के लोग झेलने को विवश हैं। ऐसे गांव के पीड़ित परिवार अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों पर रेलवे लाइन किनारे या राष्ट्रीय राजमार्ग 80 के किनारे रहने को विवश हैं। बाढ़ से विस्थापित हुए ऐसे लोगों को अब तक किसी भी प्रकार की प्रशासनिक सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। ऐसे लोग खुद के भरोसे अपने एवं अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
प्रखंड के करहरिया पूर्वी करहरिया पश्चिमी, कल्याण टोला, हरिणमार झौवाबहियार पंचायत के कई गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं। बाढ़ पीड़ित परिवार योगेंद्र मंडल, राजीव मंडल, सुबोध मंडल, कुंदन कुमार, सच्चिदानंद मंडल, राजू मंडल आदि ने बताया कि बाढ़ के पानी में हमारा घर डूब जाने के कारण पूरे परिवार के साथ ऊंचे स्थानों पर आकर रह रहे हैं। नाव तक की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण खुद की जुगाड़ से बनाए नाव पर बाढ़ के पानी से निकलकर ऊंचे स्थानों पर आकर हम पीड़ित रह रहे हैं। अब तक ना तो प्रशासनिक अधिकारी ना ही स्थानीय जनप्रतिनिधि ने हमारा हाल जानना जरूरी नहीं समझा।
बाढ़ के पानी में डूबी धान की फसल
बाढ़ का पानी गंगा के आसपास के इलाकों में अपना कहर बरपाने के बाद अब बहियार में फैलने लगा है। बरियारपुर दक्षिणी पंचायत के बहादुरपुर गांव तक बाढ़ का पानी फैल गया है। बहादुरपुर गांव तक बाढ़ के पानी फैलने के कारण कई एकड़ भूमि में लगी धान की फसल में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ के पानी में धान की फसल डूब गई है। धान की खेती करने वाले किसान रामदेव मंडल, अशोक मंडल, प्रमोद यादव, उमेश साह, अशर्फी सहनी, आदि ने कहा कि हजारों रुपए पूंजी लगाकर धान फसल की बुआई की थी। ऐसे में बाढ़ का पानी लहलहाते धान की फसल में प्रवेश कर जाने के कारण कई एकड़ धान की फसल डूब गई है। ऐसे में हम किसानों के द्वारा लगाई गई लागत भी वापस नहीं होगी। पशुपालक किसानों ने बताया कि बाढ़ के कारण पशुओं के चारा के लिए भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हम पशुपालकों के समक्ष पशु के रखने एवं खिलाने की समस्या उत्पन्न हो गई है।
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