इस साल चुनाव के बाद बुनकराें काे अपना उत्पाद बेचने काे बाजार मिल जाएगा। इसके लिए उद्याेग विभाग द्वारा 14 कराेड़ से जीराेमाइल के पास बन रहा सिल्क भवन का काम आखिरी चरण में है। सिल्क भवन का मुख्य भवन तैयार हो चुका है, सिर्फ गेट का काम बाकी है। यह भी अक्टूबर तक पूरा हो जाएगा। विधानसभा चुनाव के बाद इसका उद्घाटन होगा।
इसमें 7 विभागों के दफ्तर एक साथ चलेंगे। इससे बुनकरों को किसी भी योजना का लाभ लेने के लिए भटकना नहीं होगा। एक ही छत के नीचे रेशम, उद्याग, हैंडलूम, केंद्रीय रेशम बोर्ड, क्वालिटी कंट्रोल और इससे जुड़े अन्य विभाग काम करेंगे। भवन के नीचे बना हॉल मॉल की तरह काम करेगा। यहां बुनकर सिल्क व खादी से बने अपने उत्पाद बेच सकेंगे।
तत्कालीन कमिश्नर अजय चौधरी ने 2017-18 में सिल्क भवन बनाने की याेजना तैयार कराई थी। इसके बाद विभाग ने इसे मंजूरी दी और उद्याेग विभाग ने 14 कराेड़ रुपए दिए। 31 अगस्त तक इसे बनकर तैयार होना था, लेकिन लॉकडाउन के कारण देरी हुई। इस योजना के बाद से अब तक सिल्क के विकास के लिए कोई योजना सरकार से स्वीकृत नहीं हुई। हालांकि जिला प्रशासन ने सिल्क के विकास व बुनकराें की तरक्की के लिए कुछ याेजनाएं सरकार काे भेजी है।
लाेगाें काे भी मिलेगा बाजार
भागलपुरी सिल्क व खादी के कपड़ाें की बाहर में काफी मांग है। बड़ी संख्या में दूसरे राज्याें से लाेग यहां कपड़ा खरीदने आते हैं। इसके बनते ही उन्हें सभी सुविधाएं एकसाथ मिलेंगी। वे कपड़े की क्वालिटी व डिजाइन देखकर ऑर्डर दे सकेंगे। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। सिल्क नगरी भागलपुर की पहचान दोबारा दुनिया में स्थापित हो सकेगी।
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