पूर्व सांसद रामा सिंह ने रविवार को राबड़ी आवास (10 सर्कुलर रोड) पर जाकर राजद नेता तेजस्वी यादव से मुलाकात की। उम्मीद जताई जा रही है कि राजद के सिंबल पर वे लालगंज या महनार से चुनाव लड़ सकते हैं। रामा सिंह पांच बार विधायक रहे हैं और वर्ष 2014 में लोजपा से वे वैशाली से सांसद चुने गए थे। तब उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को हराया था। उनको राजद में शामिल कराने के मुद्दे पर पिछले कई महीने से विवाद होता रहा।
29 जून को तो तारिख भी तय हो गई थी पर रघुवंश प्रसाद सिंह के विरोध के कारण वे शामिल नहीं हाे पाए थे। रामा सिंह ने कहा कि हम राजद में आने की अपनी सहमति पहले ही दे चुके हैं। एक-दो दिनों में पार्टी का जो भी निर्णय होगा, वह सामने आ जाएगा। पार्टी बड़ी होती है, व्यक्ति बड़ा नहीं होता है। हम पहले ही तय कर चुके हैं कि राजद में शामिल होंगे। उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार करते हुए कहा कि पूरे बिहार में राजद की लहर है।
पहले फेज में राजद 23 व कांग्रेस 9 सिटिंग सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी
कांग्रेस और राजद नेतृत्व रविवार देर रात तक अपनी-अपनी सीटें तलाशते रहे। दिल्ली में कांग्रेस और पटना में राजद में बैठकों का दौर जारी रहा। अधिसंख्य सीनियर नेताओं का फोन स्वीच ऑफ बताता रहा। 10 घंटे की मंथन के बाद भी दोनों दलों के नेता यह भी तय नहीं कर पाये कि पहले फेज की 71 सीटों में से कितनी सीट पर राजद के उम्मीदवार खड़े होंगे और कितने पर कांग्रेस लड़ेगी। राजद का पहले फेज में 23 सीटिंग सीटों और कांग्रेस 9 सीटिंग सीटों पर लड़ना तय है। पर 71 सीटों में कितने पर राजद और कितने पर कांग्रेस लड़ेंगे, ये खुलासा अब तक नहीं हो पाया है।
दोनों की 10-10% सीटें लेफ्ट को
राजद-कांग्रेस दोनों ने अपनी 10-10% सीटों को वाम दलों के हवाले किया है। बिहार के समीकरण में सीपीआई, सीपीएम, माले और राजद,कांग्रेस दोनों ही दलित वंचित, पिछड़ों और अकलियतों की राजनीति करते हैं। विधानसभा में सामान्यतया कई सीटों पर कम वोट के अंतर से भी हार हो जाती है। ऐसे में आधार मतों में बंटवारे को रोकने के लिये इस बार राजद और कांग्रेस ने अपनी 10-10 फीसदी सीटों की कुरबानी दी है।
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