सड़क, पानी और सफाई में पिछड़ी स्मार्ट सिटी को रोशन करने की योजना है। पर्याप्त राशि भी सरकार ने दी। इसके बावजूद शहर 24 घंटे रोशन नहीं हो रहा है। रोज ओवरलोड से ट्रांसफॉर्मर हांफ रहे हैं। जर्जर तार टूट रहे हैं। पेड़ों की टहनियों से लगे हाईटेंशन तार से फॉल्ट होने से घंटों बिजली की अघोषित कटौती हो रही है। यूं तो पहले की तुलना में सप्लाई ठीक हुई है, लेकिन लगातार बिजली मिलने का सपना पूरा नहीं हो रहा। आलम यह है कि रोज शहर के किसी न किसी हिस्से में 4-5 घंटे की कटौती हो रही है। आंकड़े बताते हैं, एक साल में 125 दिन बिजली की कटौती की गई। बिजली के लिए आंदोलन भी होते रहे हैं। विधायक अजीत
शर्मा, पूर्व डिप्टी मेयर डॉ. प्रीति शेखर, बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति ने कई आंदोलन किए। 2019 में बिजली की खराब स्थिति पर महिलाओं ने बिजली कंपनी के दफ्तर में चूड़ियां लेकर पहुंचीं। फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ। इस विधानसभा चुनाव वोटरों ने इसे मुद्दा बनाया है। हालांकि राजनेताओं के लिए यह इस बार भी मुद्दा नहीं है। शहरवासियों की माने तो वोटिंग के आधार में बिजली भी इस बार शामिल होगा।
प्रतिमा विसर्जन रूट पर अब तक काम नहीं
2019 में ही प्रतिमा विसर्जन के रूट पर अंडरग्राउंड तार करने व खंभों की ऊंचाई बढ़ाकर कवर्ड तार लगाने थे। लेकिन इस पर एक साल में कोई काम नहीं हुआ। शहर में खंभों पर उलझे तारों से फॉल्ट हो रहे हैं और बिजली की कटौती हो रही है।
यहां बांस पर दौड़ रही बिजली : बरहपुरा, साहेबगंज, इमामपुर, बरारी समेत कई क्षेत्रों में बिजली के खंभों के अभाव में बांस पर तार दौड़ रहे हैं।
शिकायतों पर कोई कार्रवाई तक नहीं करती बिजली कंपनीखलीफाबाग के रमेशचंद्र की माने तो बिजली में सुधार नहीं हुआ है। आए दिन ट्रिपिंग और कटौती हो रही है। बाजार में तार लटक रहे हैं। तिलकामांझी के मोहन झा ने बताया, पहले से सप्लाई में सुधार है, लेकिन पूरी तरह नहीं। सिस्टम इतना खराब है कि कर्मियों को फॉल्ट ढूंढ़ने में ही कई घंटे लग रहे हैं। शिकायतों पर कोई रिस्पांस तक नहीं लिया जा रहा।
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