गर्भवती महिला और शिशुओं के शुरुआती एक हजार दिनों में बेहतर पोषण अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है। बच्चे के मस्तिष्क और शारीरिक विकास के लिए इसे अतिआवश्यक माना जाता है। ताकि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फैट इन सभी पोषक तत्वों के साथ संतुलित आहार बच्चा व जच्चा को दिया जाए।
कुपोषण के कारण बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास में रुकावट ही नहीं बल्कि इससे संक्रमित बीमारी जैसे: डायरिया, लगातार उल्टी होना, बहुत जल्दी बीमार होना, यह सब रोग प्रतिरोधक क्षमता के घटने के कारण होता है। शिशु मृत्यु दर में कुपोषण एक बहुत बड़ा कारण है। नवजात शिशुओं में होने वाले कुपोषण को दूर करने के लिए उसका समुचित उपचार करना जरूरी होता है, लेकिन इसके पहले मूल कारणों की पहचान करना भी अतिमहत्त्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, सी-मैम व अन्य सहयोगी संस्थाओं के द्वारा दिया जाता परामर्श : क्षेत्रीय कार्यालय प्रबंधक नजमुल होदा ने कहा कि जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका, आशा कार्यकर्ता व एएनएम के द्वारा अपने-अपने पोषक क्षेत्रों के सभी बच्चों का टीकाकरण नियमित रूप से दिशा-निर्देश के आलोक में कराया जाता है।

टीकाकरण के समय सभी कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों का वजन, लंबाई/ऊंचाई को एएनएम के द्वारा प्रमाणित किया जाता है। उम्र के साथ वजन, लंबाई के साथ वजन नहीं बढ़ने पर उन्हें अतिकुपोषित बच्चों की श्रेणी में रखा जाता है।

जिसे स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, यूनिसेफ के द्वारा संचालित सी-मैम कार्यक्रम सहित कई अन्य सहयोगी संस्थाओं के द्वारा कुपोषित बच्चों के परिजनों को सही सलाह के साथ मार्गदर्शन दिया जाता हैं, ताकि वह बच्चा कुपोषण से मुक्त होकर सामान्य बच्चे की तरह रह सके। कुपोषित बच्चे के माता को लगभग 250 रुपये प्रतिदिन का भत्ता दिए जाने का प्रावधान है।



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Children become physically and mentally weak due to malnutrition

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