पिछले साल सितंबर में पटना में हुए भीषण जलजमाव ने आम जनता के साथ सिस्टम की भी काफी फजीहत कराई थी। जैसे-जैसे पानी का रंग काला पड़ रहा था, वैसे-वैसे लोगों की नाराजगी भी बढ़ रही थी। पीड़ितों ने उस समय प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया था कि अगले साल चुनाव में वोट उसी काे देंगे, जो इस समस्या का स्थायी समाधान कराएगा।
खैर, इस साल बरसात में वैसी स्थिति नहीं आई। एक तो इंद्रदेव की कृपा रही, दूसरी ओर नगर निगम की तैयारी भी पुख्ता कह सकते हैं। अब सारा मुद्दा गौण हो गया और जातीय समीकरण इस पर हावी हो गया। पूरे पटना की ताे बात छोड़ दीजिए, सबसे ज्यादा प्रभावित रहने वाले राजेंद्रनगर में लोग भी अब इसे मुद्दा नहीं मान रहे।
भाजपा-माले आमने-सामने, जमीन काे अधिग्रहणमुक्त कराना बड़ा मुद्दा
दीघा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार संजीव चौरसिया और माले की शशि यादव के बीच आमने-सामने की टक्कर है। दाेनाें पक्ष से स्टार प्रचारक चुनाव प्रचार कर चुके हैं। सभी ने विकास को मुद्दा बनाया है। दीघा की 1024.52 एकड़ जमीन काे अधिग्रहण से मुक्ति दिलाना भी बड़ा मुद्दा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के भी मुद्दे उछल रहे हैं। भाजपा और माले का अपना-अपना कैडर वोट है। चुनाव मैदान में कुल 18 उम्मीदवार हैं।
भाजपा और कांग्रेस में टक्कर, युवा वोटरों के बीच पुष्पम प्रिया लोकप्रिय
बांकीपुर में भाजपा के नितिन नवीन और कांग्रेस के लव सिन्हा के बीच सीधा मुकाबला है। लेकिन, खुद को बिहार का सीएम घोषित करने वाली प्लूरल्स पार्टी की पुष्पम प्रिया युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं। इस क्षेत्र में छात्रों की संख्या अच्छी है। ऐसे में युवाओं के बीच कैंपेनिंग से मुकाबला रोचक हो गया है। नितिन नवीन हर सभा में पांच साल के काम का हिसाब दे रहे हैं। 22 उम्मीदवारों के होने से इलाका एक सप्ताह से वादों से गूंज रहा है।
धर्मेंद्र दे रहे हैं टक्कर, पांच साल का हिसाब दे नाराजगी दूर कर रहे अरुण
कुम्हरार भाजपा के अरुण सिन्हा और राजद के धर्मेंद्र कुमार के बीच सीधा मुकाबला है। पिछले साल के जलजमाव को याद दिला जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव अपने उम्मीदवार राजेश रंजन के लिए वोट मांग रहे हैं। पांच साल के हिसाब के सहारे मैदान में अरुण सिन्हा लोगों को नाराजगी को कम करने में जुटे हैं। यहां से चुनाव मैदान में कुल 24 उम्मीदवार हैं। सभी जलजमाव के स्थायी निदान का वादा कर रहे हैं।
लोजपा प्रत्याशी का नामांकन रद्द हाेने से माले-जदयू के बीच सीधी टक्कर
माले के गोपाल रविदास और जदयू अरुण मांझी बीच सीधी टक्कर है। लोजपा के सुरेश पासवान का नामांकन रद्द हो चुका है। वे अगर मैदान में होते, तो यहां का चुनावी परिदृश्य कुछ और होता। 2009 के उपचुनाव को छोड़ दें तो श्याम रजक 1995 से लगातार जीत रहे थे। इसबार राजद में चले गए। लेकिन, यह सीट महागठबंधन में माले के खाते में चले जाने से रजक बेटिकट हाे गए।
मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे भाजपा के बागी श्रीकांत निराला
मनेर विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरे श्रीकांत निराला ने इसे त्रिकोणीय बना दिया है। राजद से भाई वीरेंद्र और भाजपा से निखिल आनंद मैदान में है। तीनों यादव जाति से आते हैं। ऐसे में श्रीकांत निराला जिसके वोट में ज्यादा सेंधमारी करेंगे, उसकी मुश्किल बढ़ सकती है। हालांकि चर्चा है कि राजद-एनडीए के बीच ही है।
नंदकिशाेर का विजय रथ रोकने के कांग्रेस ने बाहरी काे मैदान में उतारा
छह बार से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे भाजपा के नंदकिशोर यादव को विकास और हर घर से सीधा लगाव का फायदा मिलता रहा है। यहां से 13 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुकाबला भाजपा के नंदकिशोर यादव और कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा के बीच ही है। 2015 के चुनाव में नंदकिशोर यादव को राजद उम्मीदवार संतोष मेहता से कड़ी टक्कर मिली थी। इसबार कांग्रेस उम्मीदवार के बाहरी हाेने का मुद्दा उछाल रहे हैं।
राजद और भाजपा में महासंग्राम के बीच दाे निर्दलीय पर भी टिकी नजर
यहां आमने-सामने का मुकाबला है। भाजपा ने फिर से आशा सिन्हा पर भरोसा जताया है। महागठबंधन की ओर से राजद ने एमएलसी रीतलाल यादव को मैदान में उतारा है। भाजपा के पुराने कार्यकर्ता अाैर नगर परिषद के उपाध्यक्ष दीपक मेहता व पूर्व पार्षद सुरेंद्र चौरसिया भी मैदान में हैं। दीपक जहां रालोसपा से, तो सुरेंद्र निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि ये दोनों किसका खेल बिगाड़ेंगे?
पूर्व विधायक विनाेद ने मैदान में उतर मुकाबले को बनाया रोचक
राजद-भाजपा के बीच भीषण मुकाबला दिख रहा है। लेकिन, भाजपा से 10 साल तक विधायक रहे डाॅ. विनोद यादव ने रालोसपा के टिकट से खड़ा होकर मामले को रोचक बना दिया है। तीनों यादव जाति से आने के कारण वोटरों पर सेंधमारी में जुटे हैं। 1985 के बाद से इस सीट पर राजद और भाजपा के बीच ही शह-मात का खेल चल रहा है, जबकि इससे पहले यहां कांग्रेस का दबदबा था।
मतदान करीब आते-आते राजद और भाजपा में कांटे की टक्कर
फतुहा विधानसभा क्षेत्र में राजद और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। भाजपा से इंजीनियर सत्येंद्र सिंह मैदान में हैं, तो राजद ने अपने सीटिंग विधायक रामानंद यादव पर भरोसा जताया है। निर्दलीय सुधीर यादव चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की काशिश में लगे रहे, लेकिन अंतिम समय में वोटर दो खानों में ही बंटते नजर आ रहे हैं। यहां से 19 उम्मीदवार मैदान में हैं। जातीय आधार पर वोटरों की गोलबंदी हो रही है।
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