यूनिसेफ ने बीते मई महीने में (लॉकडाउन) के अपने रैपिड सर्वे में पाया कि बिहार के लोगों की आय और आजीविका में 80 प्रतिशत नुकसान हुआ। 40 प्रतिशत परिवारों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ा। संगठन ने दो बार सर्वे किया। एक बार 794 और दूसरी बार 790 लोगों का। इसे गुरुवार को स्टेट प्लान ऑफ एक्शन फॉर चिल्ड्रेन (एसपीएसी) पर हुई पहली अंतर विभागीय समीक्षात्मक बैठक में साझा किया गया। बैठक में यूनिसेफ के चीफ असदुर रहमान ने एनएफएचएस 5 की रिपोर्ट के हवाले बिहार सरकार के काम को सराहा।
बच्चों-महिलाओं को सभी सेवा देने की गारंटी के लिए 16 विभाग समन्वय करें
यूनिसेफ के कार्यक्रम प्रबंधक शिवेन्द्र पाण्डेय ने बिहार के बच्चों के सामने प्रमुख चुनौतियों की जानकारी दी। कहा-बाल लिंग अनुपात 934 से 908 हो गया है। समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद ने कहा कि सरकार के सभी 16 विभागों के कर्मी गृह भ्रमण के दौरान बच्चों एवं महिलाओं से जुड़ी सभी सेवाओं को सुनिश्चित कराने के लिए आपस में समन्वय स्थापित करें।
बाल अस्तित्व, बाल विकास के हक तय करता है एसपीएसी
अतुल प्रसाद ने कहा कि एसपीएसी द्वारा 4 प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों-बाल अस्तित्व, बाल विकास, बाल संरक्षण और बाल भागीदारी के अधिकारों को सुनिश्चित कर बच्चों के लिए बेहतर जीवन प्राप्त करने के लिए विभिन्न विभागों को एकसाथ जोड़ने का काम किया जाता है। बच्चों के विकास के अनुरूप नीति बनाने में सहयोग किया जाता है। बिहार, देश के केवल दो राज्यों में से एक है जहां बच्चों के लिए राष्ट्रीय नीति के आधार पर एसपीएसी का कार्यान्वयन किया गया है।
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