कृषि सचिव डाॅ. एन. श्रवण कुमार ने किसानों से फसल अवशेष का बेहतर प्रबंधन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण के साथ मिट्टी को भी नुकसान पहुंचता है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। वे गुरुवार को बीएयू के केवीके सबाैर परिसर में फसल अवशेष प्रबंधन पर आयोजित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
किसानाें से सचिव ने कहा कि फसल अवशेष का प्रबंधन समय के अनुकूल करना बहुत जरूरी है। किसान फसल काटने के बाद पराली को जानकारी के अभाव में जला देते हैं। इससे वातावरण में तो विषैली गैस फैलते ही हैं, मिट्टी भी खराब होती है। लेकिन बीएयू के वैज्ञानिकों के प्रयास से भागलपुर और इसके आसपास के इलाकों में किसान पराली का उपयोग चारा के लिए कर रहे हैं। यह सराहनीय है।
उन्होंने मौसम के अनुकूल खेती के लिए चयनित गांवों के 50 किसानों को इसकी महत्ता की जानकारी दी। बीएयू परिसर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में विभिन्न फसलों पर किये जा रहे दीर्घकालीन परीक्षण को भी देखा। घर लौटे श्रमिकों को आर्या परियोजना के तहत मुर्गी चूजा, मछली बीज एवं शेड नेट भी दिया गया।
मौके पर मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह, बीएयू के कुलपति डाॅ. अजय कुमार सिंह, डीएम प्रणव कुमार, कृषि उप निदेशक अनिल झा, बीएयू के निदेशक डाॅ आर.के.सोहाने, डीडीसी सुनील कुमार, सहायक निदेशक डाॅ. राजेश कुमार, डीएओ केकेझा आदि मौजूद थे।
कृषि वैज्ञानिकाें ने किसानों को दी मौसम अनुकूल खेती की जानकारी
डॉक्टर एके मौर्या ने भी मौसम अनुकूल खेती पर किसानों को जानकारी दी और पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया। उन्होंने रवि व धान की फसल को जुताई किए बिना जीरो टिलेज से करने की विधि बताया। उन्होंने कहा कि इससे खेतों पानी भी कम डालना पड़ता है एवं हानिकारक गैस भी कम बनती है।
इससे ग्लोबल वार्मिंग की समस्या कम होगी। पशुपालन एवं मुर्गी पालन के लिए डॉ धर्मेंद्र कुमार ने किसानों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि खेती के साथ पशुपालन करना आवश्यक है ताकि किसानों की आमदनी बढ़ सके।
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