जेठियन से राजगीर तक श्रद्धालुओं ने 13 किलोमीटर की पदयात्रा की, गांव की हर गली हुई चकाचक, रंगोलियों से सजाई गईं सड़कें
जेठियन से राजगीर के लिए रवाना हुए बौद्ध धर्मावलंबी।
लगाए गए हैं संकल्पित स्तूप
2014 में ब्राजील के रेकार्डों द्वारा निर्मित 13 संकल्पित स्तूप घाटी में लगाए गए थे। इसके बाद राजगीर के वेणुवन में बिंबिसार की मूर्ति स्थापित की गई। इस पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं व बौद्ध भिक्षुओं ने भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थानों को भी देखा। 13 किमी की इस दूरी को पूरी करने के बाद समारोहपूर्वक 15वें इंटरनेशनल त्रिपिटक सुत्तपाठ का समापन किया गया।
क्या है जेठियन का महत्व
उरूवेला(प्राचीन बोधगया) से राजगृह लौटते समय भगवान बुद्ध यष्ठिवन(वर्तमान जेठियन) होते हुए राजगृह गए थे। जब भगवान बुद्ध जेठियन में ठहरे थे, तब राजा बिम्बिसार खुद वहां पहुंचकर उन्हें आदरपूर्वक संघ के साथ राजगृह ले गए थे व वेणुवन को संघ में दान किया था।
स्वागत गान की प्रस्तुति करती नवोदय विद्यालय की छात्राएं व मंच पर उपस्थित अतिथि।
इन देशों के थे भिक्षु व श्रद्धालु| इस यात्रा में मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया और मलेशिया के बौद्ध श्रद्धालुओं की भी सहभागिता होगी। इसके अलावे अमेरिका, थाइलैंड, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, बांगलादेश, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, ब्राजील, अर्जेंटिना, आस्टेलिया, स्पेन, इंगलैंड, स्वीटजरलैंड, ताइवान सहित अन्य देशों के भी श्रद्धालु सम्मिलित थे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Post a Comment