इंटरनेशनल त्रिपिटक सुत्तपाठ की समाप्ति के बाद शुक्रवार को 15 देशों के दो हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु व श्रद्धालु जेठियन से राजगीर पदयात्रा की। इन अतिथियों का स्वागत जेठियन नवोदय विद्यालय के छात्रों ने स्वागत गान से किया। इस पदयात्रा की शुरुआत 2014 में की गई थी। इसका मकसद अल्पविकसित बौद्ध स्थल को अंतर्राष्ट्रीय फलक पर लाना था। इस पदयात्रा को लेकर गांव की हर गली साफ की गई थी, रंगोलियों से सजाया गया था। पद यात्रा के पहले गांव के हर घर से बौद्ध भिक्षुओं ने भिक्षाटन कर भोजन ग्रहण किया। भगवान बुद्ध ने कभी जिस रास्ते पर चारिका, पदयात्रा करते हुए संबोधि प्राप्ति के बाद राजगृह लौटे थे, उस रास्ते पर हजारों साल बाद एक बार फिर से चहलकदमी शुरू की। लोगों में गजब का उत्साह दिखा। सभी भगवान बुद्ध के पदचिह्नों पर चलने को आतुर दिखें। खराब मौसम के बाद सुत्तपाठ के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई।

जेठियन से राजगीर तक श्रद्धालुओं ने 13 किलोमीटर की पदयात्रा की, गांव की हर गली हुई चकाचक, रंगोलियों से सजाई गईं सड़कें

जेठियन से राजगीर के लिए रवाना हुए बौद्ध धर्मावलंबी।

लगाए गए हैं संकल्पित स्तूप

2014 में ब्राजील के रेकार्डों द्वारा निर्मित 13 संकल्पित स्तूप घाटी में लगाए गए थे। इसके बाद राजगीर के वेणुवन में बिंबिसार की मूर्ति स्थापित की गई। इस पदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं व बौद्ध भिक्षुओं ने भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थानों को भी देखा। 13 किमी की इस दूरी को पूरी करने के बाद समारोहपूर्वक 15वें इंटरनेशनल त्रिपिटक सुत्तपाठ का समापन किया गया।

क्या है जेठियन का महत्व

उरूवेला(प्राचीन बोधगया) से राजगृह लौटते समय भगवान बुद्ध यष्ठिवन(वर्तमान जेठियन) होते हुए राजगृह गए थे। जब भगवान बुद्ध जेठियन में ठहरे थे, तब राजा बिम्बिसार खुद वहां पहुंचकर उन्हें आदरपूर्वक संघ के साथ राजगृह ले गए थे व वेणुवन को संघ में दान किया था।

स्वागत गान की प्रस्तुति करती नवोदय विद्यालय की छात्राएं व मंच पर उपस्थित अतिथि।

इन देशों के थे भिक्षु व श्रद्धालु| इस यात्रा में मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया और मलेशिया के बौद्ध श्रद्धालुओं की भी सहभागिता होगी। इसके अलावे अमेरिका, थाइलैंड, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, बांगलादेश, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, ब्राजील, अर्जेंटिना, आस्टेलिया, स्पेन, इंगलैंड, स्वीटजरलैंड, ताइवान सहित अन्य देशों के भी श्रद्धालु सम्मिलित थे।



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