बारिश से जिले में मौसम में भी हुआ है बदलाव, ठंड भी बढ़ने से उनी कपड़ों की बढ़ी डिमांड
बारिश के पानी से खलिहान में रखा धान से पानी को बाहर निकालता किसान
रबी फसल को प्रतिरक्षण| भभुआ| रबी फसल को भारी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। खेतो में पानी का जमाव हो गए है। फसल को इससे बचाव के लिए किसानों को पोटाश का छिड़काव करना चाहिए। इससे पौधे को प्रतिरोधकता व प्रतिरक्षण मिलता है। केवीके अधौरा के कृषि वैज्ञानिक अमित कुमार में बताया कि रबी फसल की जड़ो में बारिश से जलजमाव हो गया हो तो किसान पोटास का छिड़काव करें। लम मात्रा में यूरिया का भी छिड़काव करें।
धान की कटनी भी नहीं हो सकी है
किसानों की मानें तो जिले के उत्तरी हिस्से के कई प्रखंडों में अभी तक खेतों में पड़ी धान की कटनी भी नहीं हो सकी है। ऐसे में बारिश के चलते कृषि कार्य फिलहाल थम सी गई है। किसान धूप निकलने की आस में बैठे हुए हैं। बताया जा रहा है कि जिले के ज्यादातर हिस्सों में अभी गेहूं की फसल नहीं लगाई जा सकी है।
जिले में बेमौसम की बरसात ने तोड़ी किसानों की कमर, खेतों में लगी धान की फसल हुई बर्बाद
रामगढ़/मोहनिया| बेमौसम की बारिश की वजह से मोहनिया अनुमंडल क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। अनुमंडल इलाके के रामगढ़ प्रखण्ड क्षेत्र के किसानों की कमर टूट गई है। पहले प्रशासन के फरमान की वजह से हार्वेस्टर से धान की कटाई पर रोक लगाई गई। इसके बाद किसी तरह से कुछ किसानों ने मजदूरों से धान की कटनी कराई। हाथ से काटे गए धान के पौधे अभी खेतों में ही पड़े हुए थे कि गुरुवार की रात से आफत बन कर हुई बारिश की वजह से खेतों में पड़े धान के पौधे पानी से बुरी तरह भींग गए हैं। कई खेतों में तो धान के पौधे पानी में डूब गए। उन्हें वहां से उठाकर खलिहान तक लाना मुश्किल हो गया है। हालों कि कई किसानों ने कटनी के बाद धान के बोझे खलिहानों में रखने के बाद गेंहू की बुवाई शुरू कर दी है। अगर वे धान कटनी के चक्कर में पड़ेंगे तो खेतों की मिट्टी सूख जाएगी और तब गेंहू की बुवाई मुश्किल हो जाएगी।
विभाग के आंकड़े
प्रखंड बारिश(मीमी)
अधौरा 5.4
भभुआ 36. 2
भगवानपुर 26. 4
चैनपुर 28. 6
चांद 19.2
दुर्गावती 4.8
कुदरा 15.2
मोहनिया 6.2
नुआंव 26.4
रामगढ़ 32. 4
रामपुर 4.8
रामगढ़ इलाके में ईंटभट्ठे में बारिश से नुकसान का दृश्य।
जिले में संचालित ईंट उद्योग को भी हुआ है काफी नुकसान, लाखों की ईंटें बर्बाद
वहीं दूसरी तरफ जिले में गुरुवार रात की बारिश ने जिला मुख्यालय समेत रामगढ़ प्रखण्ड के ईंट भट्ठा संचालकों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। नए पाथे गए लाखों की ईंटें बारिश के पानी से गल कर बर्बाद हो गईं। ईंट उद्योग से जुड़े प्रखण्ड के व्यवसायी मनोज सिंह, अभय सिंह, मनीष कुमार, बिट्टू कुमार ने बताया कि कई जगहों पर ईंटों को पकाने का काम शुरू हो चुका है तो कहीं एक दो दिनों में शुरू होने वाला था। 14 दिसम्बर से खरमास शुरू हो जाता है। इसलिए चिमनी मालिकों का प्रयास रहता है कि इसके पहले ही ईंटों की पकाई का काम शुरू करा दिया जाय। लेकिन बारिश की वजह से अब इस कार्य में बिलम्ब होने की उम्मीद बढ़ गई है। वहीं लाखों कच्चे इट गल चुके हैं। ईंटों की पथाई करने वाले मजदूरों को भी नुकसान झेलना पड़ा है। बारिश की पानी से गली हुई ईंटों की पकाई भी नही की जा सकती है। अभी तो बारिश हुई है। शीतलहर का प्रकोप बाकी है। अगर मौसम में इसी तरह का बदलाव होता रहा तो ईंटों की कीमत में भी उछाल आ सकती है।
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