जिसका नजारा प्रतिदिन ऋषिकुण्ड में देखा जा सकता है। जिसे रोकने के प्रति जिला प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की गई है। जबकि सिर्फ जिला प्रशासन की सक्रियता से ही ऋषिकुण्ड के जंगलों से अवैध लकड़ी की कटाई को रोका जा सकता है। लेकिन जिला प्रशासन जंगल को बचाने के बजाय नए पौधे लगाने पर ही जोर दे रही है। स्थानीय बुजुर्गों की माने तो वर्षों पूर्व कालांतर में ऋषिकुण्ड कई किलोमीटर तक घने जंगलों से घिरा हुआ था। परंतु आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण जंगल सिमट कर रह गया है। ऋषिकुण्ड के आस-पास के ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग जंगलों के हरे पेड़ पौधे को काटकर घर लाते हैं। जंगल से लकड़ी ले जाकर बाजारों में बेचना इनकी आजीविका का मुख्य साधन बन चुका है। ऐसे लोगों के लिए अगर रोजगार के अवसर तलाशे जाने की जरूरत है, ताकि मुख्यमंत्री की जल जीवन हरियाली का सपना साकार हो सके।
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