इस विद्यालय में अल्पसंख्यक समुदाय के ही अधिकांश बच्चे नामांकित हैं। छोटे बच्चे एवं बच्चियां अत्यधिक दूरी होने के कारण विद्यालय नहीं जाते हैं। इस कंपकंपाती ठंढ तो एक भी विद्यार्थी विद्यालय नहीं जाते हैं। इस विद्यालय में लगभग 200 विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए सात शिक्षक हैं। बच्चों के विद्यालय नहीं आने के कारण शिक्षक दिनभर बैठे रहते हैं। विद्यालय आकर केवल हाजिरी बनाते है और समय काटकर घर चले जाते हैं। शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थी आते ही नहीं तो पढ़ाए किसको। वही विद्यार्थियों के अभिभावक इस व्यवस्था से त्रस्त है।
अभिभावक भी विद्यालय अधिक दूर होने से परेशान हैं। गांव के सलीम आलम, असगर अली, अफरीदी, इत्याक आलम, लालू राम, मदन राम, कलामुद्दीन, सफातुन नशा, ओरस खातून, रबजा खातून, हसीना खातून, लाडली बेगम, सुनेसा बेगम सहित दर्जनों लोगों का कहना है कि हमने कई बार शिक्षक एवं प्रशासन से विद्यालय को आसपास चलाने की व्यवस्था कराने की मांग की। लेकिन, उनकी कोई नहीं सुन रहा। जिस कारण वे छोटे-छोटे बच्चों को दो किलोमीटर दूर पढ़ने नहीं भेज रहे। वार्ड सदस्य मंजूर हक राय ने कहा कि छोटे बच्चे दूरी के कारण एवं दुर्घटना के डर से शिफ्ट किए विद्यालय में नहीं जा रहे हैं। प्रशासन को इसके लिए गंभीर होना चाहिए।
बीडीओ मनोरंजन कुमार पाण्डेय ने बताया कि विद्यालयों की दूरी एवं अन्य सभी व्यवस्थाओं की जांच कर अविलंब उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं एसडीओ धीरेन्द्र कुमार मिश्रा ने बताया कि इसके लिए डीईओ एवं डीएम को लिखा गया है। जल्द ही कार्रवाई होगी।
अरेराज के जर्जर विद्यालय भवन के पास खड़े ग्रामीण।
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