राजधानी में छह महीने से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चलाने वाले दो शातिरों को गांधी मैदान थाने की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने सालिमपुर अहरा की गली नंबर दो स्थित एक मकान में छापेमारी कर बंगाल के राजीव बानिक और बोकारो के अदनान सामी को पकड़ा। उनके कमरे से लाखों रुपए के टेलीफोन, मोबाइल और आईटी से जुड़े सामान बरामद किए गए हैं। ये इंटरनेशनल कॉल को लोकल कॉल में बदल कर लोगों को बातचीत करवाते थे।
सूत्रों की मानें तो आईबी ने पटना पुलिस को इस बाबत इनपुट दिया था। एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने कहा कि गिरोह के सरगना का नाम सामने आ गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि किस स्तर तक इस एक्सचेंज का दुरुपयोग किया गया है। एक आईपीएस अधिकारी ने बताया कि डेटा कॉल को वॉयस कॉल में बदलने से सबसे बड़ा खतरा राष्ट्रीय सुरक्षा को है।
गिरोह के तीनों सरगनाओं पर नेपाल में भी केस दर्ज
दोनों ने बताया कि वे 12 हजार प्रति महीने पर यहां नौकरी कर रहे हैं। गिरोह का सरगना देहरादून का अनुराग और दिल्ली का रितेश और विकास है। तीनों का कई राज्यों में फेक एक्सचेंज चलता है। तीनों पर नेपाल में भी कई केस दर्ज हैं। शातिरों ने बताया कि पूरा कॉल दिल्ली से ही मैनेज होता है और पैसे भी उनके बॉस के खाते में ही जाता है। पुलिस खाते को भी खंगाल रही है। अब तक की छानबीन में यह बात सामने आई है कि एक्सचेंज से खाड़ी देशों से अधिक फोन आते थे।
120 लोगों को एक साथ कर सकता था कॉल
राजीव व अदनान इंटर पास हैं, लेकिन दोनों ने कंप्यूटर का कोर्स किया है। शातिरों ने एक कंपनी से चार पीआरआई लिया था। एक पीआरआई से एक साथ 30 लोगों को फोन लगाया जा सकता था। चार पीआरआई से 120 लोगों को बात करवा सकते थे।
VOIP टेक्नोलॉजी पर काम करता है एक्सचेंज
यह फेक एक्सचेंज VOIP (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल टेक्नोलॉजी) पर काम करता है। विदेश में बैठा व्यक्ति इंटरनेट कॉल करता है और यह एक्सचेंज उस कॉल को सरकार के गेटवे से बचाते हुए उसे वॉयस कॉल कर लोकल में बदल देता है।
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