शहर का पहले अनियंत्रित विकास और अब इसमें विभिन्न प्रकार की योजनाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसका कारण है योजनाओं को पूरा कराने वाली एजेंसी की मनमानी। केंद्र प्रायोजित योजनाओं को पूरा करने में लगी एजेंसियां पटना के प्रमंडलीय आयुक्त के आदेश को भी नहीं मान रही हैं। आदेश के बाद भी एक साथ कई सड़कों को खोद कर काम किया जा रहा है।
केंद्र प्रायोजित नमामि गंगे के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व सीवरेज नेटवर्क बिछाने का काम बुडको के जिम्मे है। राजधानी में छह सीवरेज नेटवर्क परियोजनाओं के माध्यम से पूरे शहर में सीवरेज बिछाया जा रहा है। इसमें से दो परियोजनाओं बेउर सीवेज नेटवर्क और करमलीचक सीवरेज नेटवर्क में करीब 70 फीसदी काम हुआ है।
हालांकि, इन योजनाओं को पूरा कराने को लेकर सड़कों को खोदा गया और उसे रीस्टोर करने का कार्य नहीं किया गया। इस मामले में पिछले वर्ष मई में तत्कालीन नगर विकास मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कार्रवाई का निर्देश दिया गया था। इसके तहत 15 जून तक सभी खोदी गई सड़कों को रीस्टोर करने का आदेश दिया गया।
बुडको की ओर से दावा किया गया कि सभी सड़कों को रीस्टोर करा लिया गया है, लेकिन यह नहीं हो पाया। सड़कों के जर्जर होने और एक बार में ही मुहल्ले की सभी सड़कों को तोड़ने का मामला प्रमंडलीय आयुक्त संजय कुमार अग्रवाल के सामने आया तो 25 नवंबर की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने इस संबंध में आदेश जारी किया। उन्होंने माना कि जर्जर सड़कों के कारण जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है। इस संबंध में नगर निगम प्रशासन अपना पल्ला झाड़ रहा है। निगम प्रशासन का कहना है कि यह खुदाई एलएंडटी की ओर से कराई जा रही है।
बेउर और करमलीचक इलाके में पक्की सड़कें हो गईं कच्ची
बेउर सीवरेज नेटवर्क से 11 वार्ड और करमलीचक सीवरेज नेटवर्क से नौ वार्डों के घरों से निकलने वाले पानी को जोड़ा जाना है। इसके लिए सड़कों को खोदकर पाइपलाइन बिछाए जा रहे हैं। इन निर्माणों के कारण सड़कों की स्थिति लगातार खराब है। बेउर में पिछले डेढ़ साल से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पक्की सड़कें कच्ची हो गई हैं। स्थिति ऐसी है कि जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन जाती है। न्यू बाइपास रोड से बेउर मोड़ से घुसते ही आपको सड़क की खराब स्थिति का आभास हो जाएगा।
यातायात को चालू करने भर को ही रीस्टोर मानता है बुडको
बुडको के अधिकारियों का कहना है कि सड़क खोदे जाने के बाद यातायात को बाद में चालू करा दिया जाता है। इसे ही वे रीस्टोर करना मानकर चल रहे हैं। दूसरी तरफ, नगर विकास विभाग की ओर से समीक्षा के क्रम में साफ किया गया था कि निर्माण एजेंसियां सड़क खोदे जाने से पहले की स्थिति को बहाल करेंगी। लेकिन, बेउर व करमलीचक के इलाके में ऐसा नहीं किया गया है। दूसरी तरफ, इस मामले में नगर निगम व पथ निर्माण विभाग की ओर से नमामि गंगे परियोजना की ओर से एनओसी जारी नहीं किए जाने की बात कही जा रही है।
मेयर की ओर से उठाया गया मामला, नहीं हुई कार्रवाई
मेयर सीता साहू की ओर से भी सड़कों को अनियमित तरीके से खोदे जाने का मामला उठाया गया है। उन्होंने नगर विकास विभाग में मंत्री व सचिव को पत्र लिखकर लोगों की परेशानी को दूर करने की मांग की है। लगातार मांग किए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वे कहती हैं कि मुहल्ले के लोग निगम पार्षदों के समक्ष परेशानी बताते हैं। उन्हें समस्या का समाधान करने को कहते हैं, लेकिन बुडको हमारे स्तर पर लगातार मामला उठाए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसका खामियाजा हमें झेलना पड़ रहा है।
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